गोरखपुर, 24 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गोरखनाथ मंदिर परिसर में जनता दर्शन किया। इस दौरान उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के शीघ्र, निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने फरियादियों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “चिंता मत करें, सबकी समस्या पर प्रभावी कार्रवाई कराई जाएगी।”
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर पहुंचे, जहां फरियादी कुर्सियों पर बैठे थे। उन्होंने एक-एक कर लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री ने फरियादियों से प्रार्थना पत्र लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से संबंधित शिकायतों को संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेजते हुए उन्होंने कहा कि सभी मामलों का समाधान समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित किया जाए।
अपराध और जमीन पर जबरन कब्जे से जुड़ी शिकायतों को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में प्रभावी और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वहीं, इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर पहुंचे लोगों के प्रार्थना पत्रों पर मुख्यमंत्री ने अस्पतालों से इलाज का इस्टीमेट जल्द तैयार कराने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस्टीमेट की प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र लोगों के उपचार के लिए सरकार की ओर से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ भी पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से स्नेहपूर्वक मुलाकात की, उन्हें दुलारा और चॉकलेट देकर आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय अंदाज देखकर वहां मौजूद लोगों में भी उत्साह नजर आया।
गोरखनाथ मंदिर में अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह मंदिर की गोशाला पहुंचकर गोसेवा भी की। गोशाला में भ्रमण करते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ गोवंश को उनके नाम से पुकारा। मुख्यमंत्री की आवाज सुनते ही गोवंश दौड़कर उनके पास पहुंच गए। सीएम योगी ने उन्हें प्यार से दुलारा, उनके माथे पर हाथ फेरा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

मुख्यमंत्री ने गोशाला में मौजूद अन्य गायों और नंदी को भी अपने हाथों से गुड़ खिलाया। इस दौरान उन्होंने गोशाला के कार्यकर्ताओं से गोवंश की देखभाल और व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा उनकी बेहतर देखभाल और संरक्षण के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
