लखनऊ- उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं की समय-सारिणी जारी कर दी है। सरकार ने आवेदन से लेकर सत्यापन, स्क्रूटनी और छात्रवृत्ति भुगतान तक पूरी प्रक्रिया के लिए चरणवार समय-सीमा तय की है। इसका उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को बिना किसी अनावश्यक देरी के समय पर छात्रवृत्ति का लाभ उपलब्ध कराना है।
शासनादेश के अनुसार, छात्रवृत्ति प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, एनआईसी स्क्रूटनी और पीएफएमएस के जरिए सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि भेजने की व्यवस्था की गई है। योजना का लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को मिलेगा।
शासन की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को 22 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपना मास्टर डाटा अपलोड करना होगा। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक और संबंधित अधिकारी विद्यालयों की मान्यता, सीटों और अन्य जरूरी विवरणों का सत्यापन करेंगे। अल्पसंख्यक वर्ग के निजी विद्यालयों की पोर्टल पर मार्किंग की प्रक्रिया भी निर्धारित समय में पूरी की जाएगी।
नवीनीकरण श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन और हार्डकॉपी जमा करने की प्रक्रिया 11 अगस्त से 25 अगस्त तक चलेगी। इसके बाद विद्यालय स्तर पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, आवेदन का सत्यापन और उसे अग्रसारित करने की प्रक्रिया 30 अगस्त तक पूरी की जाएगी। आगे जिला स्तर पर छात्र संख्या का सत्यापन, एनआईसी द्वारा स्क्रूटनी और जिला समिति के स्तर से डाटा लॉक करने की प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी होगी। सरकार का लक्ष्य है कि नवीनीकरण श्रेणी के पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में अक्टूबर 2026 तक पीएफएमएस के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि सीधे भेज दी जाए।
नवीन श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया 11 अगस्त से शुरू होकर 21 सितंबर 2026 तक चलेगी। आवेदन के बाद विद्यालय और जिला स्तर पर सत्यापन तथा एनआईसी की स्क्रूटनी की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पात्र विद्यार्थियों को जनवरी 2027 के दौरान छात्रवृत्ति की राशि उनके बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जाएगी।
यदि किसी आवेदन में त्रुटि या संदिग्ध जानकारी मिलती है तो उसमें सुधार और दोबारा सत्यापन की भी व्यवस्था होगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया और पीएफएमएस के जरिए सीधे भुगतान से छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और पात्र विद्यार्थियों को समय पर योजना का लाभ मिल सकेगा।
