मुंबई: टीवी और बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी ने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए एक भावुक खुलासा किया है। ‘गंगा’ सीरियल में अम्मा जी के किरदार और ‘किंग अंकल’, ‘खलनायक’, ‘गोलमाल’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाली 61 वर्षीय अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब 1 करोड़ रुपये के कर्ज ने उन्हें मजबूरी में ऐसे प्रोजेक्ट्स करने पर मजबूर कर दिया, जिन पर उन्हें आज भी गर्व नहीं है।
सुष्मिता मुखर्जी ने बताया कि उनके करियर में कई लोगों ने सवाल उठाया कि उन्होंने कुछ C-ग्रेड और महिलाओं को अपमानित करने वाली फिल्मों में काम क्यों किया। इस सवाल ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि वे फैसले उनकी पसंद नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी का परिणाम थे।
अभिनेत्री ने बताया कि साल 2002 में उनके पति और अभिनेता-राजनेता राजा बुंदेला के साथ मिलकर चलाई जा रही उनकी मीडिया कंपनी ‘प्रयास प्रोडक्शन’ आर्थिक संकट में फंस गई थी। तकनीकी बदलाव और कारोबारी नुकसान के कारण कंपनी दिवालिया हो गई और उन पर करीब 1 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया। उन्होंने कहा कि उस दौर में कर्ज देने वाले लोग रोज घर पहुंचते थे, गालियां देते थे और पैसे की वसूली का दबाव बनाते थे। उस समय उनके बच्चे भी छोटे थे, इसलिए परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्हें हर तरह का काम स्वीकार करना पड़ा।
सुष्मिता ने भावुक होकर कहा, “क्या मैंने अपनी आत्मा बेच दी? हां, मजबूरी में ऐसा महसूस हुआ। उस समय भी अच्छा नहीं लगा था और आज भी उस दौर को याद करके अच्छा नहीं लगता। लेकिन मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी अश्लील फिल्मों में काम नहीं किया, बल्कि कुछ कमजोर और स्तरहीन फिल्मों में अभिनय किया, जिनके विषय और प्रस्तुति से वे खुद सहमत नहीं थीं। उनके मुताबिक, यह फैसला केवल परिवार को आर्थिक संकट से निकालने और कर्ज चुकाने के लिए लिया गया था।
अभिनेत्री ने यह भी बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में बेहद होनहार थी और वे उसे उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेजना चाहती थीं। विदेश में पढ़ाई का खर्च काफी ज्यादा था, इसलिए अतिरिक्त आय जुटाने के लिए भी उन्हें लगातार काम करना पड़ा। उन्होंने कहा कि तीन-चार वर्षों तक उन्होंने और उनके पति ने दिन-रात मेहनत करके पूरा कर्ज चुकाया।
अपने करियर पर बात करते हुए सुष्मिता मुखर्जी ने कहा कि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अब वे केवल वही प्रोजेक्ट चुनती हैं जो उनके दिल को छूते हैं और जिनसे उन्हें सम्मान मिलता है। उन्होंने कहा कि हर कलाकार के जीवन में ऐसा समय आ सकता है, जब उसे अपनी परिस्थितियों के अनुसार कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।
सुष्मिता ने अंत में कहा कि आज उन्हें अपने संघर्ष पर शर्म नहीं, बल्कि गर्व है क्योंकि उसी संघर्ष की बदौलत उन्होंने अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया और परिवार को आर्थिक संकट से बाहर निकाला। उनका मानना है कि हर इंसान को यह तय करना होता है कि वह पैसा किस उद्देश्य से कमा रहा है—सिर्फ ऐशो-आराम के लिए या अपने परिवार और जिम्मेदारियों को निभाने के लिए।






