गंगा, पुनपुन, सोन, कोसी समेत बिहार की कई नदियों में आई बाढ़ से 14 जिलों के निचले इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, बुधवार तक बाढ़ से 514 ग्राम पंचायतों की करीब 40.11 लाख आबादी प्रभावित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल, भोजन, आवागमन, रोजगार और इलाज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि नदियों के जलस्तर में वृद्धि थम गई है, लेकिन बाढ़ का असर अभी भी बरकरार है। करीब 700 ग्रामीण सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि 100 से अधिक सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। 14 छोटे बांध भी टूट चुके हैं। सबसे अधिक नुकसान गंगा के तटवर्ती जिलों के दियारा क्षेत्रों में हुआ है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने घर छोड़कर बांधों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। लोगों के सामने अपने भोजन के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पटना में भी बाढ़ का व्यापक असर

राजधानी पटना में बाढ़ का चौतरफा असर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकान और झोपड़ियां ध्वस्त हुई हैं, जबकि हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। करीब 10 हजार से अधिक लोगों को अपने पशुओं के साथ ऊंचे स्थानों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी विद्यालयों और प्रशासन की ओर से संचालित राहत शिविरों में रहने को मजबूर होना पड़ा है। बाढ़ के कारण पटना जिले के करीब 90 स्कूल पानी से घिरे हुए हैं, जिससे पढ़ाई और परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। इन स्कूलों में 15 से 20 सितंबर के बीच परीक्षा प्रस्तावित थी। जिला शिक्षा पदाधिकारी के मुताबिक, परीक्षा आयोजित होगी या नहीं, इसका फैसला आगे की स्थिति को देखते हुए लिया जाएगा।
पटना की 16 सड़कें क्षतिग्रस्त
बाढ़ के पानी के तेज बहाव से पटना जिले में पथ निर्माण विभाग की 16 सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। कई जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। फतुहा, मसौढ़ी, पुनपुन, बैरिया, मोजीपुर और दौलतपुर समेत कई इलाकों में सड़कों को नुकसान पहुंचा है। फतुहा और पुनपुन में बाढ़ के दौरान सड़कों के ऊपर से पानी बहने के कारण सड़क की सतह कमजोर हो गई। पानी कम होने के बाद कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त मिलीं।

युद्धस्तर पर मरम्मत का काम शुरू
बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही पथ निर्माण विभाग ने क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। विभाग की अभियंता और तकनीकी टीमें प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं। गड्ढों को भरने और क्षतिग्रस्त हिस्सों को समतल करने का काम तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जैसे-जैसे बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलता जाएगा, करीब 20 किलोमीटर क्षतिग्रस्त सड़कों की विशेष मरम्मत कराई जाएगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र ने सड़कों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
