Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। भगवान गणेश के स्वागत के लिए घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में गणपति की प्रतिमाएं पंडालों और घरों तक पहुंचने लगी हैं, वहीं आकर्षक सजावट और पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके साथ ही कई दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी।
14 सितंबर को होगी गणपति स्थापना
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। नई दिल्ली में गणेश पूजा के लिए मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है।
गणेश चतुर्थी के दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्त पूजा, आरती और भजन-कीर्तन के साथ बप्पा का आशीर्वाद लेते हैं।
पंडालों में पहुंचने लगीं गणपति की प्रतिमाएं
गणेश उत्सव शुरू होने से पहले ही महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में गणपति की प्रतिमाओं को पंडालों तक पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
कहीं ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच गणपति बप्पा को पंडाल तक लाया जा रहा है, तो कहीं भक्त पारंपरिक तरीके से भगवान गणेश का स्वागत कर रहे हैं।
बड़े शहरों में सार्वजनिक गणेश उत्सव के लिए आकर्षक पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। आयोजन समितियां पंडाल की थीम, सजावट, रोशनी और पूजा व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की सबसे ज्यादा धूम
महाराष्ट्र का गणेशोत्सव देशभर में अपनी भव्यता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मुंबई, पुणे और आसपास के क्षेत्रों में बड़े सार्वजनिक पंडालों का निर्माण किया जाता है।
गणपति स्थापना के बाद कई दिनों तक पंडालों में पूजा-अर्चना, आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन होते हैं। मुंबई समेत कई शहरों में गणपति प्रतिमाओं को पंडाल तक ले जाते समय सड़कों पर भक्तों की भीड़ और ढोल-ताशों की गूंज देखने को मिलती है।
सार्वजनिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की जाती हैं।
घर-घर में विराजेंगे गणपति बप्पा
गणेश चतुर्थी का उत्सव केवल बड़े सार्वजनिक पंडालों तक सीमित नहीं है। देशभर में बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं।
गणपति पूजा के दौरान बप्पा को मोदक और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। कई परिवारों में गणपति स्थापना वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। बच्चे और युवा भी घर की सजावट और पूजा की तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
बुद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं भगवान गणेश
गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भक्त अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार गणपति की पूजा करते हैं। गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का भी रूप ले चुका है।
अनंत चतुर्दशी पर होगा गणपति विसर्जन
गणेशोत्सव की अवधि अलग-अलग परिवारों और आयोजनों में अलग होती है। कई स्थानों पर गणपति का विसर्जन डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या दस दिन बाद किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बड़े पैमाने पर गणपति विसर्जन की परंपरा है। 2026 में अनंत चतुर्दशी और प्रमुख गणपति विसर्जन की तारीख 25 सितंबर बताई गई है।
विसर्जन के दौरान भक्त ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं।
विसर्जन को लेकर प्रशासन की भी तैयारी
गणपति विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से भीड़ और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जाती हैं।
लोगों से निर्धारित स्थानों पर ही गणपति विसर्जन करने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जाती है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित और निर्धारित विसर्जन स्थलों का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया जाता है।
14 सितंबर से गूंजेंगे ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे
गणेश चतुर्थी 2026 के साथ देशभर में गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। 14 सितंबर को गणपति स्थापना के बाद शहरों से लेकर गांवों तक बप्पा के जयकारे सुनाई देंगे।पंडालों की भव्य सजावट, आरती, भजन-कीर्तन और सामूहिक आयोजनों के बीच भक्त भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करेंगे।
