रायबरेली। उत्तर प्रदेश की रायबरेली सदर विधानसभा सीट नंबर 180 की सियासत लंबे समय से दिलचस्प रही है। रायबरेली को गांधी परिवार के मजबूत राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता है, लेकिन विधानसभा स्तर पर समीकरण अलग रहे हैं। इस सीट पर लंबे समय तक अखिलेश सिंह परिवार का प्रभाव रहा, जिसके बाद उनकी बेटी अदिति सिंह ने कांग्रेस और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों ने इस सीट के समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
2017 में अदिति सिंह की बड़ी जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अदिति सिंह ने बसपा के मोहम्मद शाहबाज खान को बड़े अंतर से हराया था। अदिति सिंह को 89,163 वोटों की बढ़त मिली थी। इस चुनाव में उनकी जीत ने रायबरेली सदर में उनके व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव को मजबूत किया।इसके बाद 2022 में अदिति सिंह ने पार्टी बदली और बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरीं। इस बार उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के राम प्रताप यादव से हुआ।
2022 में घट गया जीत का अंतर
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अदिति सिंह को 1,02,429 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के राम प्रताप यादव को 95,254 वोट हासिल हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर महज 7,175 वोट रह गया।यानी 2017 के मुकाबले 2022 में मुकाबला काफी करीब रहा। 2017 में जहां अदिति सिंह की जीत का अंतर करीब 89 हजार वोट था, वहीं 2022 में यह अंतर घटकर करीब 7 हजार वोट रह गया। यही आंकड़ा 2027 के चुनाव से पहले इस सीट को लेकर चर्चा का एक अहम आधार बन रहा है।
2024 लोकसभा चुनाव ने बदला नैरेटिव?
2024 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली सदर विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस उम्मीदवार राहुल गांधी को 1,56,525 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 53,508 वोट मिले।लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों पर लड़े जाते हैं। इसलिए 2024 के लोकसभा आंकड़ों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, ये आंकड़े सदर विधानसभा क्षेत्र में बदलते राजनीतिक रुझानों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
जातीय समीकरण भी अहम
रायबरेली सदर की सामाजिक संरचना में दलित, मुस्लिम, यादव, ठाकुर, ब्राह्मण और विभिन्न ओबीसी समूहों की मौजूदगी बताई जाती है। हालांकि, मौजूदा समय में इन समुदायों की आधिकारिक और विधानसभा-स्तर की जातिवार संख्या उपलब्ध नहीं है, इसलिए किसी समुदाय को निश्चित वोट बैंक मानना उचित नहीं होगा।
2027 में किन मुद्दों पर होगी नजर?
रायबरेली सदर में 2027 की तस्वीर कई कारकों से तय होगी। इनमें बीजेपी का उम्मीदवार, कांग्रेस-सपा का चुनावी तालमेल, अदिति सिंह की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़, स्थानीय संगठन, 2022 के विधानसभा आंकड़े और 2024 के लोकसभा वोट पैटर्न प्रमुख होंगे।इसलिए रायबरेली सदर में 2027 की लड़ाई को समझने के लिए केवल पुराने चुनाव परिणाम काफी नहीं होंगे। असली तस्वीर टिकट वितरण, उम्मीदवारों की स्थानीय स्वीकार्यता और चुनाव के समय बनने वाले सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरणों से सामने आएगी।
