खुर्रमपुर में 70 वर्षीय छिदाना गौतम की गला रेतकर हत्या, अब तक कातिलों का सुराग नहीं
अफसरों की समीक्षा बैठक और सख्ती भी बेअसर, आखिर कहां उलझी है जांच?
लखनऊ। राजधानी में संगीन अपराधों की जांच और अपराधियों तक पहुंचने के पुलिस के दावों के बीच एक बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला सवाल बनकर खड़ा है। बंथरा थाना क्षेत्र के खुर्रमपुर गांव में 70 वर्षीय छिदाना गौतम की हत्या हुए 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है। आखिर घर में अकेली रह रही बुजुर्ग महिला की जान किसने ली और हत्या के पीछे क्या वजह थी? इन सवालों के जवाब अभी भी जांच के दायरे में हैं।
20 दिन बीते, जांच वहीं की वहीं!
18 सितंबर 2026 की रात खुर्रमपुर गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई।जब घर में अकेली रह रहीं छिदाना गौतम की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया। वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। सर्विलांस और मुखबिर तंत्र का सहारा लिया गया, लेकिन दो दशक नहीं, पूरे 20 दिन गुजर जाने के बाद भी जांच किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
सवाल यह है कि आखिर जांच में ऐसी कौन-सी कड़ी है, जो पुलिस के हाथ नहीं लग रही? क्या घटनास्थल से मिले साक्ष्य पर्याप्त सुराग नहीं दे सके या संदिग्धों तक पहुंचने में पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है? इन सवालों का जवाब जांच की प्रगति से ही सामने आएगा।
अफसरों की सख्ती के बाद भी नतीजा क्यों नहीं?
संगीन घटनाओं की समीक्षा और मातहतों को सख्त निर्देश देने के बावजूद यदि हत्याकांड अनसुलझा रहता है, तो जांच की रफ्तार पर सवाल उठना लाजिमी है। अपराधियों की गिरफ्तारी और वारदातों के राजफाश के लिए पुलिस की सक्रियता कितनी प्रभावी है, इसका आकलन केवल बैठकों और निर्देशों से नहीं, बल्कि ठोस नतीजों से होता है।
छिदाना गौतम हत्याकांड में भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक ऐसा कौन-सा सुराग नहीं मिला, जो कातिलों तक पहुंचने का रास्ता खोल सके?
पहले भी सामने आ चुके हैं अनसुलझे हत्याकांड
यह मामला राजधानी में हत्या की अन्य घटनाओं की जांच को लेकर भी सवाल खड़े करता है। काकोरी क्षेत्र के इब्राहिमपुर मदारपुर गांव में महिला की हत्या कर शव फेंके जाने का मामला भी सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस मामले में भी पुलिस की जांच निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन लगातार अनसुलझे हत्याकांड पुलिस के सामने अपराधियों की पहचान और साक्ष्य जुटाने की चुनौती को जरूर उजागर करते हैं।
परिवार को इंसाफ का इंतजार, पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
छिदाना गौतम की हत्या के मामले में सबसे अहम सवाल अब भी कायम है—आखिर बुजुर्ग महिला का हत्यारा कौन है और हत्या की वजह क्या थी? पुलिस की जांच से ही इन सवालों का जवाब सामने आएगा। फिलहाल 20 दिन बीतने के बाद भी आरोपियों का पता न चलना जांच की प्रगति पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में ठोस साक्ष्य जुटाकर हत्यारों तक कब पहुंचती है और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने की राह कब साफ होती है।
