लखनऊ, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पांचवें दीक्षांत समारोह में आपातकाल के इतिहास का जिक्र करते हुए कानून के शासन और सत्ता के शासन के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण सबक है, जो बताता है कि कानून सर्वोपरि होना चाहिए।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले, आपातकाल लागू होने की परिस्थितियों और न्यायमूर्ति हंसराज खन्ना की असहमति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में न्याय के पक्ष में दिए गए फैसले और असहमति कभी व्यर्थ नहीं जाते।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद लागू हुआ था आपातकाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था ने देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था।इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि इतिहास किस तरह करवट लेता है, इसे समझना जरूरी है।
जस्टिस हंसराज खन्ना की असहमति का किया जिक्र
सीएम योगी ने अपने संबोधन में न्यायमूर्ति हंसराज खन्ना की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान न्यायमूर्ति खन्ना ने असहमति जताई थी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी।मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में लिया गया फैसला तत्कालीन परिस्थितियों में भले ही कठिन साबित हो, लेकिन उसका महत्व इतिहास में बना रहता है।
2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायमूर्ति हंसराज खन्ना की असहमति को बाद में सही माना गया।यह संदर्भ मौलिक अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संविधान की सर्वोच्चता से जुड़े न्यायिक इतिहास की अहम कड़ी है। आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता को लेकर न्यायपालिका की भूमिका आज भी भारतीय लोकतंत्र की चर्चा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ में क्या है अंतर?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1975 ने देश को ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के बीच अंतर समझाया।
- रूल ऑफ लॉ (Rule of Law): कानून का शासन, जिसमें सरकार और नागरिक सभी कानून के अधीन होते हैं।
- रूलर ऑफ लॉ (Ruler of Law): इस संदर्भ में सत्ता या शासक को कानून से ऊपर रखने की प्रवृत्ति की आलोचना की गई।
मुख्यमंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह था कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति या पद से ऊपर संविधान और कानून का स्थान होना चाहिए।
आपातकाल का इतिहास आज भी क्यों है महत्वपूर्ण?
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक निर्णायक दौर था। इस अवधि में नागरिक स्वतंत्रताओं, प्रेस की आजादी और राजनीतिक अधिकारों को लेकर व्यापक बहस हुई।सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में इसी ऐतिहासिक दौर का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन के महत्व पर जोर दिया। उनका संदेश था कि इतिहास से सबक लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।
