2002 में वाराणसी के नदेसर में हुए टकसाल सिनेमा कांड ने अब एक नया मोड़ ले लिया है हाई कोर्ट से खारिज हुई धनंजय सिंह की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने धनंजय सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर दिया है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 में तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों से अभय सिंह समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ धनंजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी कर दिया है।
इस मामले की सबसे अहम कानूनी पेच यह है कि धनंजय सिंह इस केस में न केवल पीड़ित थे, बल्कि शिकायतकर्ता भी थे। इसके बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें ‘पीड़ित’ मानते हुए अपील का अधिकार देने से इनकार कर दिया था।
यही सवाल अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है कि क्या गैंगस्टर एक्ट के मामलों में पीड़ित को अपील का अधिकार मिल सकता है या नहीं।
धनंजय सिंह ने कई बार इस घटनाक्रम में हथियार मुहैया कराये जाने का आरोप मुख़्तार अंसारी पर लगाया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई न सिर्फ इस केस की दिशा तय करेगी, बल्कि गैंगस्टर एक्ट के तहत अपील के अधिकार की कानूनी व्याख्या पर भी दूरगामी असर डाल सकती है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धनंजय सिंह की अपील को खारिज कर दिया था। यह अपील वाराणसी की स्पेशल कोर्ट द्वारा सबूतों के अभाव में चार आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज अपराध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य और समाज के खिलाफ माने जाते हैं, इसलिए किसी निजी व्यक्ति को अपील का अधिकार नहीं दिया जा सकता





