उत्तर प्रदेश की सियासत इस वक्त उबाल पर है। हर चाल के पीछे चाल है, हर बयान के पीछे संदेश। बदलाव की आहट है, “बड़े खेल” की सुगबुगाहट है। और ठीक इसी माहौल में जब केंद्रीय राजनीति से लेकर दिल्ली के पावर कॉरिडोर तक तरह तरह की चर्चाएं चल रही हैं, तभी लखनऊ के मंच से एक ऐसा बयान गूंजा जिसने यूपी से लेकर दिल्ली तक बैठे तमाम सियासी विरोधियों की नींद उड़ा दी।
बयान देने वाले कोई और नहीं, बल्कि देश के रक्षा मंत्री और बीजेपी के सबसे सधे हुए रणनीतिकार माने जाने वाले राजनाथ सिंह थे और केंद्र में थे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। राजनाथ सिंह की खुली तारीफ ने एक बात साफ कर दी है: योगी का दबदबा कल भी था, आज भी है और आने वाले कल में और तेज़ होगा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय जो हो रहा है, वह सामान्य हलचल नहीं है। यह सत्ता, संगठन और भविष्य की दिशा तय करने वाली लड़ाई का संकेत है। ऐसे वक्त में लखनऊ में आयोजित अशोक लीलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के उद्घाटन समारोह ने सिर्फ एक औद्योगिक कार्यक्रम की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि यह सियासी संदेशों का मंच बन गया।राजनाथ सिंह ने मंच से जो कहा, वह महज़ औपचारिक शिष्टाचार नहीं था।
उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि “योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री मैंने आज तक नहीं देखा, और शायद आगे भी न देखूं।”यह बयान यूपी में बैठे योगी विरोधियों और दिल्ली में बैठे रणनीतिक हलकों के लिए किसी सियासी सायरन से कम नहीं था। राजनाथ ने न सिर्फ योगी के प्रशासन की तारीफ की, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि “जो काम मैं अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नहीं कर पाया, वह योगी ने कर दिखाया।”जब देश का रक्षा मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी का वरिष्ठतम चेहरा ऐसा कहता है, तो इसका मतलब साफ है योगी केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य के स्तंभ हैं।
जब योगी आदित्यनाथ 2017 से पहले और बाद के उत्तर प्रदेश की तुलना कर रहे थे गुंडाराज से कानून का राज,,,बीमारू राज्य से इंफ्रास्ट्रक्चर हब अराजकता से निवेश का भरोसा तो मंच पर बैठे राजनाथ सिंह हर बात पर तालियां बजाते नजर आए। यह दृश्य अपने आप में एक राजनीतिक बयान था। मानो राजनाथ सिंह यह बताना चाह रहे हों कि योगी की बात सिर्फ सुनी नहीं जा रही, बल्कि स्वीकृत और समर्थित भी है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कटने की चर्चा ने सबसे ज्यादा अगर किसी को सक्रिय किया है, तो वह योगी आदित्यनाथ हैं।
कहा जा रहा है कि इस पूरे खेल के पीछे मकसद सिर्फ एक हैयोगी की छवि को नुकसान पहुंचाना,,, 2027 में हार की स्थिति में सारा ठीकरा योगी के सिर फोड़ना यही वजह है कि योगी आज असामान्य रूप से एक्शन मोड में दिख रहे हैं।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विधायकों और मंत्रियों को सख्त संदेश “अगर अभी जनता के बीच नहीं गए, मतदाताओं के नाम नहीं जुड़वाए, तो 27 में टिकट बचाना मुश्किल होगा।”यह चेतावनी नहीं, अल्टीमेटम था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक तरफ पंकज चौधरी संगठन और विधायकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ सीधे जनता और सिस्टम को मजबूत करने में लगे हैं।
यह टकराव खुला नहीं है, लेकिन साइलेंट पावर स्ट्रगल के संकेत साफ दिख रहे हैं। राजनाथ सिंह ने योगी सरकार के लॉ एंड ऑर्डर,,गुड गवर्नेंस,,डिफेंस कॉरिडोर ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण,,जैसे मुद्दों पर खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि “भारत के विकसित राष्ट्र बनने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाएगा।” यह बयान सिर्फ प्रदेश के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य के लिए भी अहम है। राजनाथ सिंह के ताजा वक्तव्य के बाद अब इसमें कोई संदेह नहीं बचता कि RSS और पार्टी का एक बड़ा धड़ा, योगी आदित्यनाथ के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
अब इस पूरी खबर का निष्कर्ष क्या है तो वो भी आप जान लीजिये योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी परेशानी उनकी लोकप्रियता है। उनका मजबूत जनाधार ही उनके सियासी दुश्मनों की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। बीजेपी के पास आने वाले समय में अगर कोई ऐसा चेहरा है जो पार्टी को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है, तो वह योगी आदित्यनाथ हैं। और शायद यही वजह है कि उन्हें घेरने की कोशिशें तेज हैं,,उनकी छवि पर वार हो रहे हैं,और सियासी खेल और खतरनाक होते जा रहे हैं,,लेकिन इतिहास गवाह है —जिस नेता की धार वक्त के साथ तेज होती जाए, उसे कमजोर करना आसान नहीं होता। योगी सिर्फ यूपी की सियासत नहीं चला रहे, वह भविष्य की राजनीति की पटकथा लिख रहे हैं।





