मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में चल रहे माघ मेले की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि पवित्रता, संवाद और समन्वय के साथ माघ मेले के सभी प्रमुख स्नान सकुशल संपन्न होंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उन्हें माघ मास में पावन त्रिवेणी संगम में दर्शन और स्नान का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने स्मरण कराया कि गत वर्ष इसी समय महाकुंभ की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही थीं और 10 जनवरी को वह इसी उद्देश्य से प्रयागराज आए थे। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष माघ मेला 3 जनवरी से प्रारंभ होकर 15 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसकी मुख्यमंत्री स्वयं लगातार निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पौष पूर्णिमा के अवसर पर माघ मेले में 10 से 15 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, लेकिन 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पावन त्रिवेणी में स्नान किया। श्रद्धालुओं ने भगवान वेणी माधव, बड़े हनुमान जी महाराज और अक्षयवट के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि कल्पवासी एक माह के कल्पवास के लिए साधना में लीन हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्हें भगवान जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी की 726वीं पावन जयंती के कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। प्रयागराज को उन्होंने ऋषि-मुनियों की पावन भूमि बताते हुए महर्षि भारद्वाज और याज्ञवल्क्य जैसे महान संतों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री योगी ने जानकारी दी कि माघ मेले के दौरान 14-15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को वसंत पंचमी, इसके बाद माघ पूर्णिमा और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के स्नान पर्व आयोजित होंगे। इन सभी आयोजनों के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेले के लिए घाटों की लंबाई बढ़ाई गई है, स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है और भीषण शीतलहर से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेला सेवा ऐप का शुभारंभ किया गया है। इस ऐप के माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक सेवाओं और समस्याओं के समाधान में तुरंत मदद मिल रही है।
प्रशासन पूरी तत्परता से जुटा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वास जताया कि जिस तरह पौष पूर्णिमा का स्नान सकुशल संपन्न हुआ, उसी तरह आगामी सभी प्रमुख स्नान पर्व भी पूरी पवित्रता, संवाद और समन्वय के साथ सुरक्षित रूप से संपन्न होंगे।





