Home Delhi दिल्ली: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट...

दिल्ली: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में मतभेद

68
0

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के बीच मतभेद सामने आया है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीठ में शामिल दोनों न्यायाधीशों की राय अलग-अलग है, जिससे यह मामला आगे बड़ी पीठ के समक्ष जा सकता है।

प्रशांत भूषण के अनुसार, वरिष्ठ न्यायाधीश ने धारा 17ए को असंवैधानिक करार दिया है। उनका मानना है कि यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट की दो पूर्व और वरिष्ठ पीठों के फैसलों के विपरीत है। वहीं, दूसरे न्यायाधीश की राय इससे भिन्न रही। उन्होंने कहा कि यदि जांच या अभियोजन के लिए अनुमोदन केवल सरकार से लिया जाना अनिवार्य हो, तो यह व्यवस्था असंवैधानिक होगी। लेकिन अगर यह अनुमोदन लोकपाल या लोकायुक्त जैसे किसी स्वतंत्र प्राधिकरण द्वारा दिया जाए, तो धारा 17ए को संवैधानिक रूप से बनाए रखा जा सकता है।

जानिये क्या है धारा 17ए?

धारा 17ए को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 के माध्यम से शामिल किया गया था। इस प्रावधान के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। सरकार का तर्क रहा है कि यह प्रावधान ईमानदार अधिकारियों को फर्जी और दुर्भावनापूर्ण मामलों से बचाने के लिए लाया गया।

भ्रष्टाचार-विरोधी कानूनों का इतिहास

भारत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रयास स्वतंत्रता से पहले के दौर से ही होते रहे हैं। आम धारणा रही है कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। इसी पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1947 लागू किया गया था। हालांकि, इसके बावजूद भ्रष्टाचार की घटनाओं में कमी नहीं आई।

इसके बाद सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 लागू किया, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनों को समेकित और सख्त बनाना था। समय-समय पर इसमें संशोधन किए गए ताकि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप कानून को प्रभावी बनाया जा सके। 2018 संशोधन और विवाद
2018 के संशोधन के जरिए धारा 17ए को शामिल करते समय सरकार ने यह दलील दी थी कि इससे एक ओर जांच एजेंसियों को स्पष्ट दिशा मिलेगी और दूसरी ओर ईमानदार लोक सेवकों को अनावश्यक उत्पीड़न से राहत मिलेगी।

https://itreesoftwares.in/filmitics/the-public-is-troubled-by-the-arbitrary-actions-of-the-jalkal-department-being-handed-huge-bills-without-any-facilities/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here