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राम के नाम पर सियासत गरम, और अब संत समाज भी मैदान में उतर आया है!

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समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने जैसे ही प्रभु श्रीराम को “समाजवादी” बताया, राजनीति की ज़मीन हिल गई।बीजेपी के बाद अब तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सपा पर ऐसा तीखा हमला बोला है, जिसने सियासी बहस को नई आग दे दी है।मिडिया से खास बातचीत में रामभद्राचार्य ने सीधे-सीधे अखिलेश यादव की पार्टी से सवाल दाग दिए। अगर राम समाजवादी थे, तो गोलियां क्यों चली थीं?

”रामभद्राचार्य ने वीरेंद्र सिंह के बयान पर तंज कसते हुए कहा“अच्छा है, इसी बहाने सपा के लोगों ने भगवान राम का नाम तो लिया।लेकिन ये भी बताएं कि अगर भगवान राम समाजवादी थे, तो समाजवाद के पुरोधा कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां क्यों चलवाई थीं?अयोध्या को रामभक्तों के खून से क्यों रंगा गया था?”
उन्होंने आगे एक और सीधा सवाल उछाल दिया“अगर राम समाजवादी हैं, तो अखिलेश यादव अब तक रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या क्यों नहीं गए?”


रामभद्राचार्य यहीं नहीं रुके।उन्होंने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा “भगवान राम राष्ट्रवादी भी हैं और मानवतावादी भी।उन्होंने कभी परिवारवाद का सहारा नहीं लिया।राम मूल रूप से राष्ट्र और मानवता के प्रतीक हैं।”यूपी में आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर रामभद्राचार्य ने बड़ा बयान देते हुए कहा“राजनीति धर्म और जाति की नहीं, राष्ट्र की होनी चाहिए।जातिगत राजनीति बंद होनी चाहिए,जाति के आधार पर आरक्षण और जाति आधारित जनगणना पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।”अब सवाल यही है—क्या राम के नाम पर छिड़ी यह बहस 2027 की राजनीति की दिशा तय करेगी? और क्या सपा इन सवालों का जवाब दे पाएगी?

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