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अस्पतालों में लागू होगा नया बिलिंग नियम, सरकार ने पेश किया स्टैंडर्ड फॉर्मेट

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नई दिल्ली: स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम पहल की है। अब देशभर के अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटरों को इलाज से जुड़े बिल एक मानक प्रारूप (स्टैंडर्ड फॉर्मेट) में जारी करने होंगे। इस नए नियम से मरीजों को इलाज के खर्च की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और मनमानी बिलिंग पर रोक लगेगी।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अस्पतालों की बिलिंग व्यवस्था के लिए ‘IS 19493: 2025’ नामक नया भारतीय मानक जारी किया। यह मानक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा तैयार किया गया है।

आइटम-वाइज बिलिंग होगी अनिवार्य

नए नियमों के तहत अब अस्पतालों को आइटम-वाइज बिलिंग करनी होगी। यानी मरीज के बिल में रूम रेंट, डॉक्टर की परामर्श फीस, दवाइयों का खर्च, जांच शुल्क, इलाज या सर्जरी पैकेज और अन्य सेवाओं का विवरण अलग-अलग स्पष्ट रूप से देना अनिवार्य होगा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को यह समझने में आसानी होगी कि किस सेवा के लिए कितना शुल्क लिया गया है।

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सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर लागू होगा नियम

यह नया बिलिंग फॉर्मेट केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नर्सिंग होम, क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटरों सहित सभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर लागू होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इलाज से जुड़ी हर सेवा की कीमत पारदर्शी और समझने योग्य हो।

पढ़ने में आसान और डिजिटल सुविधा

बिल को मरीजों के लिए अधिक उपयोगी बनाने के लिए इसमें स्पष्ट और पढ़ने योग्य फॉन्ट के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों को बिल डिजिटल और फिजिकल—दोनों रूपों में उपलब्ध कराना होगा, ताकि मरीज भविष्य में किसी विवाद या क्लेम के समय आसानी से इसका उपयोग कर सकें।


बिलिंग विवादों में आएगी कमी


BIS द्वारा तैयार इस पहल का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों और मरीजों के बीच होने वाले बिलिंग विवादों को कम करना और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि पारदर्शी बिलिंग से मरीजों को सशक्त बनाया जा सकेगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित होगी।नए मानक के लागू होने के बाद उम्मीद है कि अस्पतालों की बिलिंग प्रणाली अधिक स्पष्ट, निष्पक्ष और मरीजों के अनुकूल होगी, जिससे देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार आएगा।

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