164 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित, 140 यूनिट्स पहले से बंद मिलीं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पैकेज्ड ड्रिंकिंग व मिनरल वाटर इकाइयों के खिलाफ प्रदेशव्यापी सख्त अभियान चलाया है। आयुक्त FSDA के निर्देश पर एक साथ सभी जनपदों में कार्रवाई करते हुए अंतरजनपदीय टीमों का गठन किया गया।
प्रदेशभर में एक साथ छापेमारी, 522 यूनिट्स का निरीक्षण
विशेष अभियान के तहत प्रदेश में कुल 522 पैकेज्ड वाटर प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
140 इकाइयां पहले से बंद, 382 यूनिट्स जांच के दायरे में
निरीक्षण के दौरान 140 इकाइयां बंद पाई गईं, जबकि संचालित पाई गई 382 इकाइयों से कुल 387 नमूने गुणवत्ता जांच के लिए संग्रहित किए गए। इन नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
104 इकाइयों को सुधार नोटिस, खामियों पर जताई नाराजगी
FSDA की टीमों ने जांच के दौरान 104 इकाइयों में तकनीकी और प्रक्रियागत कमियां पाईं। इन सभी को सुधार नोटिस जारी करते हुए तय समय सीमा में मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
164 इकाइयों में गंभीर अनियमितताएं, लाइसेंस निलंबित
जांच में 164 पैकेज्ड वाटर यूनिट्स में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इनमें जल शोधन प्रक्रिया, स्वच्छता, मानक उपकरण और दस्तावेजों से जुड़ी खामियां पाई गईं। इन सभी इकाइयों के लाइसेंस निलंबित कर व्यवसाय बंद कराने का निर्णय लिया गया है।
असुरक्षित पानी बेचने वालों पर सख्ती जारी
FSDA ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025 में जिन इकाइयों के नमूने असुरक्षित पाए गए थे, उनके लाइसेंस भी निलंबित किए जाएंगे। उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनस्वास्थ्य सर्वोपरि, आगे भी जारी रहेगा अभियान
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर के नाम पर मिलावट या मानकों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे केवल प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त ब्रांड का ही पानी इस्तेमाल करें।






