Home Uttar Pradesh UPSIFS में क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के दूसरे बैच की शुरुआत

UPSIFS में क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के दूसरे बैच की शुरुआत

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100 पुलिस अधिकारियों को मिलेगा फोरेंसिक और साइबर विवेचना का विशेष प्रशिक्षण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में “क्राइम सीन मैनेजमेंट” कोर्स के दूसरे बैच का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और महानिदेशक लखनऊ जोन सुजीत पाण्डेय रहे।

45 दिनों तक चलेगा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

इस कोर्स में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जिलों से आरक्षी से लेकर निरीक्षक रैंक तक के कुल 100 पुलिस अधिकारी भाग ले रहे हैं। 45 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में क्राइम सीन मैनेजमेंट की बारीकियों के साथ-साथ फोरेंसिक साइंस और साइबर अपराध से जुड़े विषयों पर गहन अध्ययन कराया जाएगा।

घटना स्थल को हल्के में लिया तो कोर्ट में मुश्किलें बढ़ेंगी

मुख्य अतिथि सुजीत पाण्डेय ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो पुलिस अधिकारी घटना स्थल को गंभीरता से समझता है, उसे बाद में अदालत में परेशान नहीं होना पड़ता। वहीं जो अधिकारी घटनास्थल की जांच को सतही तौर पर करता है, उसके मामलों में साक्ष्यों की कमी रह जाती है और कई बार आरोपी छूट जाते हैं।
उन्होंने कहा कि “घटना स्थल खुद बोलता है, जरूरत है तो सिर्फ उसे समझने और साक्ष्य सही तरीके से जुटाने की।”

बड़े केस स्टडी के जरिए समझाई फोरेंसिक की अहमियत

महानिदेशक ने देश के कई चर्चित मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सही ढंग से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाई जा सकी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे कानूनी जरूरतों के अनुरूप कार्य करें ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।

UPSIFS बना विश्वस्तरीय फोरेंसिक संस्थान

सुजीत पाण्डेय ने UPSIFS की सराहना करते हुए कहा कि वे इस संस्थान की नींव पड़ने के समय के साक्षी रहे हैं और आज इसे एक विश्वस्तरीय फोरेंसिक संस्थान के रूप में विकसित होते देखना गर्व का विषय है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री और संस्थान के संस्थापक निदेशक के प्रयासों की प्रशंसा की।

फोरेंसिक एक्सपर्ट विवेचना की रीढ़: डॉ. जी.के. गोस्वामी

UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ किसी भी विवेचना की धुरी होते हैं। उन्होंने बताया कि फोरेंसिक विज्ञान न केवल दोषियों को सजा दिलाने में मदद करता है, बल्कि निर्दोष को बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि डीएनए जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध को नकारने की हर गुंजाइश खत्म कर देते हैं और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं।

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती पर भी चर्चा

डॉ. गोस्वामी ने कहा कि तकनीक के विकास के साथ अपराध का स्वरूप भी बदल गया है। आज कई अपराध साइबर स्पेस में हो रहे हैं, जैसे डिजिटल अरेस्ट और ई-रॉबरी। ऐसे में पुलिस को तकनीकी रूप से और ज्यादा सक्षम बनना होगा।

डीएनए और ड्रोन लैब का किया गया निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक लखनऊ जोन ने संस्थान की डीएनए लैब और ड्रोन लैब का भी निरीक्षण किया और वहां मौजूद आधुनिक सुविधाओं की जानकारी ली।

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