प्रयागराज में चल रहे माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद सुर्खियों में है। विवाद तब शुरू हुआ जब शंकराचार्य अपनी पालकी में सैकड़ों अनुयायियों के साथ संगम तट पर स्नान करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पालकी से उतरकर पैदल स्नान करने का आदेश दिया।
विवाद कैसे शुरू हुआ
शंकराचार्य के शिष्य और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस और हाथापाई की स्थिति पैदा हो गई, इस दौरान शंकराचार्य ने धरना दिया और कई अधिकारियों की फोटो मीडिया के सामने पेश की उन्होंने विशेष रूप से प्रयागराज पुलिस कमिश्नर IG जोगिंदर कुमार पर निशाना साधा।
शंकराचार्य ने कहा, “प्रयागराज कमिश्नर ने कहा था, ‘बहुत ज्यादा गर्मी चढ़ी है, सारी गर्मी उतार दूंगा।’ ये वही अधिकारी हैं जिन्होंने हमारे अनुयायियों पर कार्रवाई की और कई को चोटिल किया।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने भगदड़ कराकर जान-माल के नुकसान की साजिश रची थी, शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे संगम में तब ही स्नान करेंगे जब उन्हें सम्मानपूर्वक वहां लाया जाएगा।
कौन हैं IPS जोगिंदर कुमार?

जोगिंदर कुमार 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और राजस्थान के बाड़मेर के रहने वाले हैं, यूपी कैडर में नियुक्त होने के बाद उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया, जोगिंदर कुमार की नियुक्ति के बाद प्रयागराज में कानून व्यवस्था और मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक नज़रिया
इस विवाद ने माघ मेला और प्रयागराज प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, शंकराचार्य और प्रशासन के बीच यह टकराव न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विवाद की भी तस्वीर पेश करता है।





