विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर देशभर में विवाद लगातार गहराता जा रहा है, नए नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी वर्गों के शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समानता कोषांग (Equity Cell) गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
UGC के इस कदम का जहां एक वर्ग स्वागत कर रहा है, वहीं सवर्ण समाज इसका खुलकर विरोध कर रहा है। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे की खबर सामने आई, राजनीतिक दल फिलहाल खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन अब पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य इस कानून के समर्थन में सामने आ गए हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान
पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर UGC कानून का खुलकर समर्थन किया है, उन्होंने कहा कि UGC का मूल उद्देश्य शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय स्थापित करना था, लेकिन वास्तविकता यह है कि SC, ST और OBC वर्ग के साथ सुनियोजित अन्याय किया जा रहा है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक विश्वविद्यालयों में आरक्षित पदों को जानबूझकर खाली रखा जा रहा है।
- स्कॉलरशिप और फेलोशिप रोकी जा रही हैं
- एडहॉक और गेस्ट फैकल्टी में आरक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है
- रोस्टर सिस्टम से छेड़छाड़ कर संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन किया जा रहा है
उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग पहले SC-ST-OBC को ‘हिंदू बनो’ और ‘जात-पात छोड़ो’ के नारे देते थे, वही लोग आज हिंदू के नाम पर UGC में इन वर्गों के अधिकारों का विरोध कर रहे हैं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने पूछा “क्या SC, ST और OBC हिंदू नहीं हैं?”
15 जनवरी 2026 से लागू हुआ नया रेगुलेशन
UGC द्वारा समानता कोषांग गठित करने वाला यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू कर दिया गया है, इसके लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया, सोशल मीडिया पर इस कानून के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया जा रहा है।
इस नए नियम की सबसे अहम बात यह है कि अब अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है।
विवाद की जड़ क्या है?
नए नियमों के अनुसार समानता कोषांग में SC, ST और OBC वर्ग के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भेदभाव से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सवर्ण वर्ग का आरोप है कि यह व्यवस्था एकतरफा है और इससे समाज में नए तरह का विभाजन पैदा होगा, इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश में सबसे पहले डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने उठाया था, जंतर-मंतर पर धरना देने से रोके जाने का मामला भी काफी चर्चा में रहा।
इसके बाद अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने विवाद को और हवा दे दी, जिससे यह मुद्दा अब सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक रूप भी ले चुका है।
आगे क्या?
UGC के नए नियम अब शिक्षा, राजनीति और समाज तीनों स्तरों पर बहस का बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। एक तरफ जहां सामाजिक न्याय की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसके विरोध में आंदोलन की चेतावनियां दी जा रही हैं, आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और UGC इस बढ़ते विरोध पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या नियमों में किसी तरह का संशोधन किया जाता है।





