अगर गुमशुदगी पर तुरंत कार्रवाई होती, तो बेटी का अंतिम संस्कार कर पाते माता-पिता
लखनऊ। पारा थाना क्षेत्र के शीतल हत्याकांड ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर और असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के आरोपों के मुताबिक यह मामला सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि लापरवाही, टालमटोल और सूचना छिपाने का भी है। अब हंसखेड़ा चौकी इंचार्ज की भूमिका भी सीधे सवालों के घेरे में आ गई है।
13 जनवरी को लापता हुई शीतल, चौकी पर दी गई थी सूचना

शीतल के विकलांग पिता राजकिशोर ने बताया कि 13 जनवरी को बेटी के घर से गायब होने के बाद वह तुरंत पास की हंसखेड़ा चौकी पहुंचे थे।
उन्होंने चौकी इंचार्ज मुन्ना लाल को बेटी की गुमशुदगी की लिखित तहरीर दी थी।

“दोस्तों के साथ घूमने गई होगी”, कहकर टाल दिया गया मामला
पिता का आरोप है कि तहरीर लेने के बाद चौकी इंचार्ज ने यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि
“बेटी कहीं दोस्तों के साथ घूमने गई होगी, खुद लौट आएगी।”
परिजनों का कहना है कि इसी लापरवाही ने पूरे मामले को और भयावह बना दिया।
पुलिस की तत्परता पर सवाल, पिता का दर्द छलका
राजकिशोर का कहना है कि अगर उसी दिन खोजबीन शुरू होती, तो हालात कुछ और हो सकते थे।
उनका आरोप है कि पुलिस की उदासीनता की वजह से वे अपनी ही बेटी का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए।
पुलिस का दावा: 13-14 जनवरी की रात हो चुकी थी हत्या
पुलिस का दावा है कि शीतल की हत्या 13 और 14 जनवरी की दरम्यानी रात कर दी गई थी।
यानी जिस समय परिवार तलाश में भटक रहा था, उस समय पुलिस के पास कार्रवाई का पूरा अवसर था।
शव मिला, 72 घंटे रखा गया… फिर अज्ञात में अंतिम संस्कार
सरोजनीनगर पुलिस ने पंचायतनामा के बाद शव को 72 घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस में शिनाख्त के लिए रखा।
16 जनवरी को शिनाख्त न होने का हवाला देकर शव का अज्ञात में अंतिम संस्कार करा दिया गया।

चौंकाने वाला विरोधाभास: उसी दिन दर्ज हुआ मुकदमा
गौर करने वाली बात यह है कि 16 जनवरी को ही शीतल की मां पिंकी की तहरीर पर अंशू गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
परिजनों का सवाल है कि जब नामजद तहरीर मौजूद थी, तो शव की जानकारी परिवार को क्यों नहीं दी गई?
फोटो में दिखे अहम सुराग, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई?
परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस के पास मौजूद शीतल की तस्वीरों में
उसकी जैकेट और शाल शव से कुछ दूरी पर पड़ी दिखाई दे रही है।
उनका कहना है कि यह साफ संकेत था कि घटनास्थल के आसपास ही सच्चाई छिपी है, लेकिन पुलिस ने इन सुरागों को गंभीरता से नहीं लिया।
10 दिन बाद अचानक खुलासा, परिवार को मिला सदमा
परिजनों के अनुसार 25 जनवरी की रात पुलिस ने फोन कर पिता को सुबह थाने बुलाया।
थाने पहुंचने पर बताया गया कि शीतल की हत्या हो चुकी है और इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

“सच छिपाने की कोशिश हो रही है”– परिजनों का आरोप
शीतल के पिता का सीधा आरोप है कि हंसखेड़ा चौकी इंचार्ज और पारा पुलिस कुछ न कुछ छिपाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि अगर शुरू से ईमानदारी और तत्परता होती, तो यह मामला इतना दर्दनाक न बनता।
पुलिस का पक्ष: गिरफ्तारी के बाद खुला राज
पारा पुलिस का कहना है कि 24 जनवरी को मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड का पूरा खुलासा हुआ। हालांकि परिजन इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
बेटी के अंतिम संस्कार से वंचित माता-पिता, इंसाफ की गुहार
अपनी बेटी को अंतिम विदाई तक न दे पाने का दर्द माता-पिता को अंदर से तोड़ रहा है। परिजनों ने मांग की है कि हंसखेड़ा चौकी और पारा पुलिस की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।


