गया/बोधगया: बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गया में एक कार्यक्रम के दौरान अपराध और सुशासन को लेकर सख्त बयान दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “बिहार सुशासन से चलेगा, कान खोलकर सुन लीजिए, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए सरकार जो भी कदम उठाना पड़ेगा, वह उठाएगी”, उन्होंने आगे कहा कि गया पिंडदान के लिए प्रसिद्ध है और इसी संदर्भ में कड़ा संदेश देते हुए बोले, “कुछ लोगों का पिंडदान शुरू हो गया है, आगे भी बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए ऐसे कई अपराधियों का पिंडदान हमारी सरकार करती रहेगी।”
मठ की जमीन और अवैध कब्जे पर बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री ने बोधगया में मठ की जमीन से जुड़े मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाया, उन्होंने कहा कि मठ की जमीन से अवैध कब्जा हटाने का अभियान बोधगया से शुरू किया जाएगा, सरकार ने साफ किया है कि धार्मिक और सार्वजनिक जमीनों पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर भी बयान
सीएम सम्राट चौधरी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में मंत्री और विधायकों के बच्चे क्यों नहीं पढ़ते, उन्होंने घोषणा की, कि अगले दो वर्षों में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें।
सीएम बनने के बाद पहला गया दौरा
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मुख्यमंत्री पहली बार गया और बोधगया पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर विष्णुपद कॉरिडोर का निरीक्षण किया, इसके साथ ही उन्होंने फल्गु नदी तट और देवघाट क्षेत्र का भी दौरा किया, इसके बाद वे बोधगया पहुंचे और महाबोधि मंदिर में पूजा की।
विकास परियोजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बीटीएमसी कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर बोधगया कॉरिडोर परियोजना की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, रास्ते में कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया।
निष्कर्ष
गया और बोधगया दौरे के दौरान दिए गए बयानों और फैसलों ने साफ संकेत दिया है कि सरकार कानून-व्यवस्था, जमीन विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब सख्त रुख अपनाने के मूड में है।






