आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है, समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी इस मुद्दे पर मायावती और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ एकजुटता दिखाई है, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि कांशीराम के अनुयायी लंबे समय से उनसे भारत रत्न देने की मांग करते रहे हैं और सपा भी इस मांग के साथ खड़ी है, इस बयान के बाद तीनों दल इस मुद्दे पर एक साथ नजर आए।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव ने कहा, “मान्यवर कांशीराम और समाजवादी पार्टी ने मिलकर देश को एक नई दिशा दी थी, उस समय कांशीराम और सपा ने मिलकर भाजपा का मुकाबला किया और उन्हें हराया, इसके बाद बीजेपी अपने हर कार्यक्रम में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर लेकर आने लगी, जो लोग कांशीराम के रास्ते पर चलते हैं और उनके साथ जीवनभर संघर्ष कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि उन्हें सम्मान मिले और भारत रत्न मिले। हम भी इस मांग के साथ खड़े हैं।”
अखिलेश यादव से पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की थी।
बसपा और कांग्रेस का समर्थन
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर को लंबे समय तक भारत रत्न नहीं दिया, वैसी गलती भाजपा या एनडीए सरकार को नहीं करनी चाहिए, उन्होंने कहा कि कांशीराम का योगदान समतामूलक समाज बनाने में अतुलनीय है, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि कांशीराम ने दलित, पिछड़ों और बहुजन राजनीति को नई दिशा दी और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए, राहुल गांधी ने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा यूपी विधानसभा चुनाव में सियासी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, कांग्रेस और सपा की नजर दलित वोटबैंक पर है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कांशीराम के भारत रत्न की मांग को चुनावी मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।





