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बंगाल चुनाव से पहले TMC में बड़ा फेरबदल, BJP ने दिया ‘नो एंट्री’ का संकेत

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी नई उम्मीदवार सूची में 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। इस फैसले से पार्टी के अंदर हलचल बढ़ गई है और कई नेताओं में नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम TMC की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी शायद एंटी-इंकंबेंसी (सरकार के खिलाफ नाराजगी) को कम करने और नए चेहरों को मौका देने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर टिकट काटने से असंतोष बढ़ना भी स्वाभाविक माना जा रहा है।

BJP ने दिया ‘नो एंट्री’ का संदेश

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मौके पर अपनी रणनीति साफ कर दी है। खड़गपुर सीट से नेता दिलीप घोष ने TMC पर निशाना साधते हुए कहा कि कई नेता टिकट कटने के बाद परेशान हैं और BJP से संपर्क कर रहे हैं।

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लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार BJP ऐसे नेताओं को शामिल करने के मूड में नहीं है। उनके मुताबिक, पिछली बार पार्टी से कुछ गलतियां हुई थीं, जब कमजोर उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था। अब पार्टी सिर्फ उन्हीं लोगों को मौका देना चाहती है जो संगठन से जुड़े हों और जमीनी स्तर पर मजबूत हों।

TMC में बढ़ सकता है असंतोष

TMC ने अपने 209 विधायकों में से 135 को दोबारा मौका दिया है, जबकि 74 के टिकट काट दिए गए हैं। इसके अलावा 15 नेताओं की सीटें भी बदली गई हैं। इस सूची से कई बड़े नाम बाहर हो गए हैं, जिससे पार्टी के अंदर नाराजगी बढ़ने की संभावना है।

सूची में जिन प्रमुख नेताओं के नाम नहीं हैं, उनमें पार्थ चटर्जी, विवेक गुप्ता, परेश पाल, असित मजूमदार, चिरंजीत, कंचन मलिक, मुकुटमणि अधिकारी और जीवन कृष्ण साहा शामिल हैं।

इसके अलावा चार मंत्री—ताजमुल हुसैन, बिप्लब रॉय चौधरी, ज्योत्स्ना मंडी और मनोज तिवारी—को भी टिकट नहीं दिया गया है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी बड़े स्तर पर बदलाव कर रही है।

बदलते राजनीतिक समीकरण

बंगाल की राजनीति में टिकट वितरण हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। कई बार इसी वजह से नेताओं के पार्टी बदलने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में TMC के इस फैसले के बाद दलबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।

हालांकि BJP फिलहाल ‘नो एंट्री’ की नीति अपनाकर यह संदेश देना चाहती है कि वह अब संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, न कि सिर्फ दूसरे दलों के नेताओं को शामिल करने पर।

कुल मिलाकर, 2026 चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ TMC नए चेहरों के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है, तो वहीं BJP भी अपनी रणनीति को पहले से ज्यादा मजबूत और संतुलित बनाने में जुटी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन फैसलों का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।

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