बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त हमेशा से ही लाइमलाइट से दूर रही हैं। जहां स्टार किड्स अक्सर फिल्मी दुनिया में कदम रखने के लिए उत्सुक रहते हैं, वहीं त्रिशाला ने अपनी जिंदगी के लिए एक अलग रास्ता चुना। वह लंबे समय से अमेरिका में रह रही हैं और वहीं अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को आगे बढ़ा रही हैं। हालांकि हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बॉलीवुड को लेकर अपने मन की बात साझा की, जिसने उनके फैंस को हैरान कर दिया।
एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान त्रिशाला ने खुलासा किया कि बचपन में वह बॉलीवुड का हिस्सा बनना चाहती थीं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनका उद्देश्य कभी भी एक्ट्रेस बनना नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि उनका बॉलीवुड से जुड़ने का सपना सिर्फ इसलिए था ताकि वह अपने पिता संजय दत्त के करीब रह सकें और उनके साथ ज्यादा समय बिता सकें।
त्रिशाला ने बताया कि बचपन में उनके लिए पिता के साथ समय बिताना सबसे ज्यादा मायने रखता था। संजय दत्त अपने करियर में काफी व्यस्त रहते थे, ऐसे में उन्हें लगता था कि अगर वह भी उसी इंडस्ट्री में होंगी तो उन्हें पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिलेगा। यही वजह थी कि उन्होंने बॉलीवुड को एक विकल्प के तौर पर सोचा, न कि अपने करियर के लक्ष्य के रूप में।
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उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा यथार्थवादी सोच रखने की सलाह दी। संजय दत्त ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि सिर्फ फिल्मी परिवार से होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें आसानी से फिल्मों में काम मिल जाएगा या वह एक बड़ी स्टार बन जाएंगी। इस सलाह ने त्रिशाला के सोचने के नजरिए को प्रभावित किया और उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
इंटरव्यू के दौरान त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के मुद्दे पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में इस विषय पर पहले बहुत कम लोग खुलकर बात करते थे। लेकिन जब दीपिका पादुकोण ने अपने डिप्रेशन और मानसिक संघर्षों को सार्वजनिक रूप से साझा किया, तो उन्हें काफी प्रेरणा मिली। उन्होंने प्रियंका चोपड़ा की भी तारीफ की और कहा कि दोनों अभिनेत्रियों ने इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने खुद एक थेरापिस्ट बनने का फैसला इसलिए लिया ताकि वह लोगों को यह समझा सकें कि मानसिक समस्याओं से जूझना कोई कमजोरी नहीं है और कोई भी व्यक्ति इस संघर्ष में अकेला नहीं है। उनका मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि संजय दत्त ने साल 1987 में ऋचा शर्मा से शादी की थी और 1988 में त्रिशाला का जन्म हुआ। लेकिन कम उम्र में ही उनकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद त्रिशाला की परवरिश विदेश में हुई। आज वह अपनी सौतेली मां मान्यता दत्त और अपने सौतेले भाई-बहनों के साथ भी अच्छा रिश्ता साझा करती हैं।
त्रिशाला दत्त की यह कहानी बताती है कि हर स्टार किड का सपना बॉलीवुड में करियर बनाना नहीं होता। कई बार उनके फैसलों के पीछे भावनात्मक कारण भी होते हैं, जो उन्हें एक अलग राह चुनने के लिए प्रेरित करते हैं।






