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दरवाज़ा छूते ही क्यों लगता है करंट? जानिए स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी का आसान विज्ञान

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दरवाज़ा छूते ही करंट लग जाए, डेस्क से मोबाइल उठाते ही झटका महसूस हो या किसी से हाथ मिलाते समय अचानक “करंट” का एहसास हो, ये अनुभव आजकल कई लोगों के साथ आम हो गया है, सामने वाला पूछ ही लेता है, ”क्या भाई, आजकल बड़ा करंट मार रहा है, बात भले मज़ाक में कही जाती है, लेकिन हमारे दिमाग़ में भी ये सवाल आता ज़रूर है, और इस सवाल का एक ही जवाब है: स्टेटिक चार्ज या स्टेटि इलेक्ट्रिसिटी आजकल अगर आप भी ये महसूस कर रहे हैं कि अलग-अलग सामान छूने या किसी इंसान से हाथ मिलाने पर करंट सा लगता है, तो इसके लिए यही स्टेटिक चार्ज ज़िम्मेदार है. लेकिन ये है क्या?

इसे समझने से पहले एक आसान उदाहरण याद करना ज़रूरी है, वही “गुब्बारे वाला जादू”, जो हम बचपन में किया करते थे, जब हम गुब्बारे को अपने बालों या कपड़े से रगड़ते थे और फिर उसे दीवार पर चिपका देते थे, तो वह बिना किसी गोंद के टिक जाता था, दरअसल, यह कोई जादू नहीं था, बल्कि स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी का असर था, जो रगड़ने के कारण पैदा होती है और वस्तुओं को आपस में आकर्षित कर देती है, यह वही वैज्ञानिक सिद्धांत है.. जो आज भी हमारे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे “करंट” वाले अनुभवों के पीछे काम करता है, किसी भी चीज़ की सतह पर जमा होने वाले इलेक्ट्रिक चार्ज को स्टेटिक चार्ज कहते हैं, आसान भाषा में समझें तो यह तब बनता है जब छोटे-छोटे कण, जिन्हें इलेक्ट्रॉन कहते हैं, एक चीज़ से दूसरी चीज़ में चले जाते हैं, यह प्रक्रिया आमतौर पर तब होती है जब दो चीज़ें आपस में रगड़ती हैं या एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं, जैसे ही रगड़ या संपर्क होता है, कुछ इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से निकलकर दूसरी वस्तु पर चले जाते हैं, इससे दोनों वस्तुओं पर चार्ज का असंतुलन पैदा हो जाता है, और वही हमें कभी-कभी “करंट” जैसा महसूस होता है, अगर इसे और सरल तरीके से समझें, तो हर चीज़ छोटे-छोटे कणों से बनी होती है, और उन एटम के बाहर घूमने वाले इलेक्ट्रॉन आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं… जब उन्हें पर्याप्त ऊर्जा मिलती है जैसे रगड़ने से तो वे अपने स्थान से हटकर दूसरी चीज़ पर चले जाते हैं, और इसी वजह से स्टेटिक चार्ज बनता है.

जबकि, प्रोटोन यानि पॉजिटिव चार्ज एटम के न्यूक्लियस में मज़बूती से बंधे होते हैं, इसलिए आसानी से इधर से उधर नहीं जा सकते.जब इलेक्ट्रॉन किसी एटम से चले जाते हैं तो वो न्यूट्रल नहीं रह जाता क्योंकि अब उसमें नेगेटिव चार्ज की तुलना में पॉजिटिव चार्ज ज़्यादा है, इसे एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं गुब्बारे वाला “जादू” जब हम गुब्बारे को अपने बालों पर रगड़ते हैं, तो बालों से कुछ इलेक्ट्रॉन निकलकर गुब्बारे पर चले जाते हैं, इस वजह से बाल पॉजिटिव चार् हो जाते हैं और गुब्बारा नेगेटिव चार्ज हो जाता है, अब जब आप गुब्बारे को बालों के पास लाते हैं, तो दोनों एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं इसी तरह, सूखे मौसम में इलेक्ट्रॉन आसानी से इधर-उधर मूव करते हैं और किसी चीज़ की सतह पर जमा हो जाते हैं, जब हम किसी चीज़ को छूते हैं या रगड़ते हैं, तो ये इलेक्ट्रॉन अचानक एक वस्तु से दूसरी वस्तु में ट्रांसफर हो जाते हैं, इसी अचानक ट्रांसफर की वजह से हमें हल्का सा “करंट” या शॉक महसूस होता है, जो आजकल कई लोगों को अनुभव हो रहा है, स्टेटिक चार्ज बनने के तीन मुख्य कारण होते हैं, जब दो चीज़ों को आपस में रगड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी चीज़ में चले जाते हैं इससे चार्ज का संतुलन बिगड़ जाता है दूसरा है जब दो चीज़ें एक-दूसरे को छूती हैं, तब भी इलेक्ट्रॉन एक से दूसरी में ट्रांसफर हो सकते हैं और चार्ज बदल सकता है तीसरा है कभी-कभी कोई चार्ज वाली चीज़ बिना छुए भी पास आने पर दूसरी चीज़ में चार्ज पैदा कर सकती है, यानी सिर्फ पास होने से ही असर दिखने लगता है, सरल शब्दों में, रगड़, छूना और पास आना ये तीनों तरीके स्टेटिक चार्ज बनने या बदलने का कारण बन सकते हैं

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