उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप में 5 डॉक्टरों को सेवा से हटा दिया गया है, जबकि 16 अन्य चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
सरकार की जांच में सामने आया कि कई डॉक्टर लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित थे। इसी आधार पर गोरखपुर, कुशीनगर, बलरामपुर, अमेठी और औरैया जिलों के डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की गई। इसके अलावा अंबेडकर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और अन्य अधिकारियों पर निजी नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच जारी है।हरदोई के संडीला क्षेत्र में भी चिकित्सा अधीक्षक पर अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगा है। वहीं, कई अन्य डॉक्टरों पर अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार, गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाने और प्राइवेट प्रैक्टिस जैसे गंभीर आरोप पाए गए हैं।
इन मामलों में किसी का वेतन रोका गया है तो किसी की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई है।सरकार ने साफ कर दिया है कि मरीजों की सेवा में लापरवाही या भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन स्थापित करने और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।अब इस कार्रवाई को केवल दंडात्मक कदम नहीं, बल्कि एक सुधारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ईमानदारी से काम करने वाले चिकित्सकों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसा मजबूत होगा।






