Home Uttar Pradesh “जालौन में बदली सोच की तस्वीर: परिवारों की सहमति से हुआ पुनर्विवाह”

“जालौन में बदली सोच की तस्वीर: परिवारों की सहमति से हुआ पुनर्विवाह”

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जालौन से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां पुनर्विवाह को लेकर समाज में बनी झिझक और रूढ़ियों को तोड़ते हुए एक अनूठी मिसाल पेश की गई है। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शिवालय मंदिर में परिजनों की पूरी सहमति से एक दंपति ने पुनर्विवाह किया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

आमतौर पर जहां प्रेम विवाह को लेकर सामाजिक तनाव के मामले सामने आते हैं, वहीं जालौन जिले के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित शिवालय मंदिर में एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां दोनों ओर के परिजनों की पूर्ण सहमति और रजामंदी से द्रोपदी ने अनिल कुमार के साथ पुनर्विवाह किया। यह विवाह न केवल दो व्यक्तियों का मिलन था, बल्कि दो परिवारों की सोच और सामाजिक सौहार्द की भी मिसाल बन गया।

बता दे कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित शिवालय मंदिर में विधिवत रूप से वर-वधू ने फेरे लिए। इस अवसर पर दोनों पक्षों के परिजन और रिश्तेदार बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मंदिर परिसर में आयोजित इस विवाह समारोह में स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और नवदंपत्ति को आशीर्वाद दिया। इस पुनर्विवाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें दोनों ओर के परिवारों ने पूरी सहमति दी। वधू के पक्ष से उनके परिजनों ने बताया कि यह विवाह पूरी तरह से परिवार की इच्छा और आशीर्वाद से हो रहा है। वर पक्ष के परिजनों ने भी इस रिश्ते को खुशी-खुशी स्वीकार किया।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, द्रोपदी पुत्री मथुरा प्रसाद मूल रूप से झांसी जिले के सेसा गांव की निवासी हैं, जबकि अनिल कुमार एट के शांतिनगर क्षेत्र में रहते हैं। दोनों ने परिजनों की मौजूदगी में एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। यह पुनर्विवाह समाज में बदलती सोच का प्रतीक भी बना। आमतौर पर पुनर्विवाह को लेकर समाज में झिझक और रूढ़ियां देखने को मिलती हैं, लेकिन इस मामले में दोनों परिवारों ने इन परंपराओं से ऊपर उठकर मानवीय रिश्तों और खुशी को प्राथमिकता दी।

स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के विवाह समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं। परिजनों की मौजूदगी में संपन्न हुआ यह विवाह उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है जो सामाजिक दबाव के कारण अपने जीवन के फैसले नहीं ले पाते। वहीं नवविवाहित जोड़े के परिजनों ने बताया कि हमारे परिवार में सभी की सहमति से यह विवाह संपन्न हुआ है। बेटी की खुशी हमारे लिए सबसे बड़ी है। हमें खुशी है कि दोनों परिवारों ने मिलकर इस रिश्ते को साकार किया। पुनर्विवाह को लेकर समाज में जो भ्रांतियां हैं, उन्हें तोड़ने की जरूरत है।

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