मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब सिर्फ पेट्रोल-गैस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इंटरनेट सेवाओं पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को अलर्ट जारी किया है और उन्हें किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।
दरअसल, हम जो इंटरनेट रोज इस्तेमाल करते हैं, वह सैटेलाइट से नहीं बल्कि समुद्र के नीचे बिछी लंबी केबल्स के जरिए हमारे तक पहुंचता है। ये केबल्स हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं। अगर मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण इन समुद्री केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
इसका असर सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई ट्रांजैक्शन और ऑफिस के कामों पर भी पड़ सकता है। यानी अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ती है, तो इंटरनेट की स्पीड धीमी हो सकती है या कुछ सेवाएं कुछ समय के लिए बंद भी हो सकती हैं।
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सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे वैकल्पिक रास्ते (बैकअप) तैयार रखें, ताकि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो डेटा दूसरे रास्ते से भेजा जा सके। इसको लेकर Department of Telecommunications (DoT) ने Reliance Jio, Bharti Airtel और Tata Communications जैसी बड़ी कंपनियों के साथ बैठक भी शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया की तरफ से आने वाला इंटरनेट रास्ता बंद होता है, तो ट्रैफिक को सिंगापुर के रास्ते यानी दूसरे समुद्री मार्ग से भेजा जाएगा। लेकिन यह रास्ता लंबा है, इसलिए इंटरनेट की स्पीड पर असर पड़ सकता है और डेटा पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता है।
कुछ अहम समुद्री केबल्स भी इस समय खतरे में हैं। जैसे SEA-ME-WE 4 cable और TGN-Gulf cable। युद्ध जैसे हालात के कारण इन केबल्स की मरम्मत करने वाले जहाज भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। खासकर जेद्दा के पास खराब हुई केबल्स को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत के बड़े डेटा सेंटर प्लान पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही Meta Platforms जैसी कंपनियों के नए केबल बिछाने के प्रोजेक्ट भी फिलहाल रुक सकते हैं।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरी तरह इंटरनेट बंद होने की संभावना कम है, लेकिन सेवाओं की क्वालिटी जरूर गिर सकती है। यानी इंटरनेट धीमा हो सकता है या कुछ ऐप्स सही से काम नहीं कर सकते।
आगे की बात करें तो टेलीकॉम कंपनियां अब सरकार से मदद मांग रही हैं। वे चाहती हैं कि सरकार अन्य देशों से बातचीत करे ताकि इन केबल्स को नुकसान से बचाया जा सके। फिलहाल सबसे जरूरी है कि मौजूदा सिस्टम को सुरक्षित रखा जाए और भारत में इंटरनेट सेवाएं बिना रुकावट के चलती रहें।




