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आकाशवाणी के कार्यक्रम में CM योगी का हल्का-फुल्का अंदाज, Malini Awasthi के सम्मान पर छिड़ी हंसी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath गुरुवार को लखनऊ के Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस खास मौके पर उन्होंने कई क्षेत्रों में काम करने वाली जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जब मुख्यमंत्री के मजाकिया अंदाज ने पूरे सभागार को हंसी से भर दिया।

दरअसल, जब प्रसिद्ध लोक गायिका Malini Awasthi को सम्मान देने की बारी आई, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके पति और अपने सलाहकार Awanish Awasthi को लेकर मजाक किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने अवनीश अवस्थी को कार्यक्रम में देखा, उन्हें समझ आ गया कि मालिनी अवस्थी का नाम जरूर होगा, क्योंकि आमतौर पर वह कम ही नजर आते हैं।मुख्यमंत्री ने हंसते हुए आगे कहा कि रिटायरमेंट के बाद शायद यह स्थिति हो गई है कि अगर घर में तालियां नहीं बजाएंगे तो शाम का खाना भी नहीं मिलेगा। इसलिए उन्होंने अवनीश अवस्थी से मजाक में कहा कि जब आप यहां आ ही गए हैं तो सामने बैठने के बजाय मंच पर ही आ जाइए। मुख्यमंत्री की इस बात पर मंच पर मौजूद सभी लोग, खुद मालिनी अवस्थी और अवनीश अवस्थी भी, जोर-जोर से हंसने लगे। पूरा सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।

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कार्यक्रम के दौरान एक और दिलचस्प पल तब आया, जब उद्घोषक ने अवनीश अवस्थी को मंच पर बुलाते हुए कहा कि किसी महिला की सफलता के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत इस बात को सुधारते हुए कहा कि यह उल्टा कहा गया है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि असल में किसी पुरुष की सफलता के पीछे महिला का बड़ा योगदान होता है। मुख्यमंत्री की यह बात सुनकर एक बार फिर से पूरे हॉल में तालियों की गूंज सुनाई दी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकाशवाणी की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब देश के कई दूरदराज इलाकों में सड़कें भी ठीक से नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन आकाशवाणी वहां तक अपनी आवाज पहुंचा देता था। यह सिर्फ एक रेडियो सेवा नहीं थी, बल्कि लोगों को जोड़ने का एक मजबूत माध्यम था।

उन्होंने आगे कहा कि बदलते समय के साथ आकाशवाणी को भी खुद में बदलाव लाना होगा, ताकि वह नई पीढ़ी तक अपनी पहुंच और मजबूत कर सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आकाशवाणी ने हमेशा हिंदी और उसकी अलग-अलग बोलियों जैसे भोजपुरी, अवधी, गढ़वाली और कुमाऊंनी को बढ़ावा दिया है। इसके जरिए स्थानीय भाषा और संस्कृति को पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आकाशवाणी केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों को ज्ञान देने, उनकी आस्था का सम्मान करने और लोक कला को मंच देने का काम भी करता रहा है। उन्होंने इस संस्था की भूमिका को देश के सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण बताया।

इस पूरे कार्यक्रम में जहां एक तरफ सम्मान और उपलब्धियों की चर्चा हुई, वहीं मुख्यमंत्री के हल्के-फुल्के अंदाज ने माहौल को और भी यादगार बना दिया।

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