क्या उत्तर प्रदेश में अब ब्राह्मण सुरक्षित नहीं हैं? क्या अब सिर्फ ब्राह्मण नाम सुनते ही उनके साथ दुर्व्यवहार और हिंसा की घटनाएं सामने आने लगी हैं? काशी हिंदू विश्वविद्यालय से आई एक घटना ने इन सवालों को और भी तेज कर दिया है। आरोप है कि एक छात्र से पहले उसकी जाति पूछी गई और जैसे ही उसने बताया कि वह ब्राह्मण है, उसके साथ बेरहमी से मारपीट कर दी गई। यह मामला अब सिर्फ एक छात्र की पिटाई का नहीं बल्कि समाज में बढ़ती जातीय नफरत और राजनीतिक चुप्पी का मुद्दा बनता जा रहा है।
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वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के हिंदी विभाग में MA द्वितीय वर्ष के छात्र प्रशांत मिश्रा ने आरोप लगाया है कि कुछ छात्रों ने पहले उनसे उनका नाम और जाति पूछी। पीड़ित का कहना है कि जैसे ही उन्होंने अपना नाम बताया, हमलावरों ने उन्हें ब्राह्मण बताते हुए अपशब्द कहे और फिर मारपीट शुरू कर दी। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के बीच गुस्सा देखने को मिला और कई छात्रों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब आरोप समाजवादी छात्र सभा के BHU इकाई अध्यक्ष हिमांशु यादव पर लगा। पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद कार्रवाई करते हुए हिमांशु यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या जाति के आधार पर होने वाली हिंसा को लेकर समाज और राजनीति का रवैया एक जैसा है। कई लोगों का कहना है कि हर जाति और हर समाज के व्यक्ति की सुरक्षा समान रूप से महत्वपूर्ण है और किसी भी प्रकार की जातीय हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच पर है, लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ गई है – क्या शिक्षा के सबसे बड़े केंद्रों में भी जाति की दीवारें अभी तक नहीं टूटी हैं? और क्या समाज अब इन सवालों का ईमानदारी से जवाब खोजेगा?






