उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर इतिहास को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने तीखी आपत्ति जताई है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने सालार मसूद गाजी को “माफिया” और “खलनायक” बताया, जबकि महाराजा सुहेलदेव को “नायक” के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।
सीएम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि सालार मसूद गाजी को “माफिया” या “आक्रांता” बताना इतिहास के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है। उनके अनुसार, गाजी एक ऐतिहासिक और धार्मिक व्यक्तित्व हैं, जिनकी अपनी मान्यता और जगह है। साथ ही उन्होंने महाराजा सुहेलदेव के योगदान को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका भारत की आजादी या आधुनिक भारत के निर्माण में कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं रहा।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी लगातार महाराजा सुहेलदेव को विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक मानती रही है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सुहेलदेव ने सालार मसूद गाजी को पराजित कर भारतीय अस्मिता की रक्षा की थी, जिसे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जाता है। गौरतलब है कि सालार मसूद गाजी और महाराजा सुहेलदेव को लेकर इतिहासकारों और विभिन्न समूहों के बीच लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं। यही वजह है कि इन दोनों ऐतिहासिक पात्रों को लेकर समय-समय पर सियासत गरमाती रहती है।
फिलहाल, सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान और AIMIM की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।






