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सीएम योगी ने कांग्रेस नेता की जमकर की तारीफ! परिवार के सामने सुनाए दिलचस्प किस्से, सब रह गए हैरान

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गोरखपुर दौरे पर CM योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता डॉ टीपी शाही को किया याद, सुनाए पुराने किस्से

गोरखपुर दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में डॉ टीपी शाही आधुनिक कंप्यूटर लैब का उद्घाटन किया, इस दौरान उन्होंने गोरखपुर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे स्वर्गीय डॉ टीपी शाही को याद करते हुए उनकी जमकर सराहना की, मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ टीपी शाही भले ही कांग्रेस के नेता थे, लेकिन उनका गोरखनाथ मंदिर से गहरा जुड़ाव था, उन्होंने उन्हें एक कुशल राजनेता के साथ-साथ एक उत्कृष्ट शिक्षाविद बताया।

राजनीति से ऊपर थे संबंध

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ टीपी शाही का व्यक्तित्व ऐसा था, जो राजनीति और व्यक्तिगत संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखता था।

उन्होंने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि गोरखपुर के डॉ एचपी चिल्ड्रन अकादमी स्कूल में एडमिशन के लिए लंबी लाइनें लगती थीं, उस समय वे गोरखपुर के सांसद थे और लोग उनसे सिफारिश के लिए कहते थे, वे मजाक में कहते थे कि “वो कांग्रेस के नेता हैं, हमारी बात क्यों मानेंगे?”, लेकिन लोग जवाब देते थे कि “गोरखनाथ मंदिर की सिफारिश वे टाल नहीं सकते,” इस उदाहरण से उन्होंने डॉ शाही के प्रभाव और सम्मान को रेखांकित किया।

भावुक पल: जब अंतिम समय में मिले थे डॉ शाही

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री उस भावुक पल को याद कर भावुक हो गए, जब डॉ टीपी शाही अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपने दोनों बेटों को लेकर उनसे मिलने लखनऊ पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि डॉ शाही ने अपने पुत्रों अनन्य प्रताप शाही और अतिरेक शाही से उनका परिचय कराया, उन्होंने कहा, “अब आप ही इनके अभिभावक हैं,” इसके कुछ समय बाद ही लखनऊ में उनका निधन हो गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद उन्हें अपने अंतिम समय का आभास हो गया था, इसलिए वे अपने बच्चों को लेकर उनसे मिलने आए थे।

विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं बेटे

सीएम योगी ने बताया कि अनन्य प्रताप शाही आज डॉ एचपी चिल्ड्रन अकादमी को सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं, वहीं अतिरेक शाही लखनऊ हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं, दोनों ही अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और समाज में अपना योगदान दे रहे हैं।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि भी था, जिसने राजनीति से ऊपर उठकर समाज और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

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