17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका, जिसके चलते यह बिल पारित होने से रह गया। मतदान के दौरान सदन में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न जुटा पाने के कारण यह विधेयक गिर गया और मौजूदा सत्र में पारित नहीं हो सका।
इस घटनाक्रम के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए आक्रामक रुख अपना लिया है। पार्टी ने शनिवार से देशभर में व्यापक प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
इसी कड़ी में देर रात उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के झंडे जलाकर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान अपर्णा यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाली राजनीतिक शक्तियों के खिलाफ देश की महिलाओं में आक्रोश है। उन्होंने इसे “नारी सम्मान और अधिकारों की लड़ाई” बताते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई जाती, तो यह आत्मसम्मान के खिलाफ होता। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की नारी शक्ति अपने अधिकारों के खिलाफ खड़े होने वालों को कभी माफ नहीं करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब दिया जाएगा।
महिला आरक्षण विधेयक के गिरने के बाद अब यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है, जहां एक ओर सत्तापक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों का प्रश्न बना रहा है, वहीं विपक्ष अपनी रणनीति पर कायम नजर आ रहा है।






