बिजली उपभोक्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच अब सरकार ने स्मार्ट मीटर से जुड़े नियमों में राहत देने वाले कई अहम बदलाव किए हैं। खास तौर पर उन इलाकों के लिए, जहां पहले से स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, नई गाइडलाइन लागू की गई है ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

नए नियमों के मुताबिक, मीटर कन्वर्जन के दौरान उपभोक्ताओं को कुल 45 दिनों की राहत दी जाएगी। इसमें 15 दिन का सामान्य समय और 30 दिन की अतिरिक्त छूट शामिल है। इस अवधि में किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, जिससे लोगों को भुगतान या अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने का पर्याप्त समय मिल सके।
इसके अलावा, स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म होने पर भी उपभोक्ताओं को तुरंत अंधेरे का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब बैलेंस शून्य होने के बाद भी तीन दिनों तक या 200 रुपये तक की बिजली खपत (2 किलोवाट लोड तक) जारी रहेगी। वहीं, रविवार और अन्य सरकारी छुट्टियों के दिन बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, चाहे बैलेंस खत्म ही क्यों न हो।
उपभोक्ताओं को समय रहते जानकारी देने के लिए पांच स्तर का एसएमएस अलर्ट सिस्टम भी शुरू किया जा रहा है। इसके तहत बैलेंस 30 प्रतिशत और 10 प्रतिशत रहने पर सूचना दी जाएगी, बैलेंस खत्म होने पर अलर्ट मिलेगा, कनेक्शन कटने से एक दिन पहले चेतावनी दी जाएगी और कनेक्शन कटने के बाद भी जानकारी भेजी जाएगी। स्मार्ट मीटर और पारंपरिक मीटर के बीच अंतर भी साफ किया गया है। जहां पहले बिजली विभाग का कर्मचारी हर महीने घर-घर जाकर रीडिंग लेता था, वहीं अब स्मार्ट मीटर में रीडिंग स्वतः विभाग तक पहुंच जाती है।
पारंपरिक व्यवस्था में बिजली उपयोग के बाद बिल चुकाया जाता था, जबकि स्मार्ट मीटर प्रीपेड सिस्टम पर काम करता है, जिसमें उपभोक्ता को पहले रिचार्ज कराना होता है। साथ ही, उपभोक्ता मोबाइल ऐप के जरिए अपनी रोजाना बिजली खपत पर नजर रख सकते हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए बिजली आपूर्ति में किसी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खराब ट्रांसफार्मर तुरंत बदले जाएं और ढीले तार या स्पार्किंग जैसी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट चुके हैं, उनसे अधिकारी खुद संपर्क कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान सुनिश्चित करेंगे।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने दो टूक कहा है कि उपभोक्ताओं की संतुष्टि सरकार की प्राथमिकता है और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।






