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जन आक्रोश पदयात्रा: नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लखनऊ में दिखा जबरदस्त समर्थन

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में और विपक्ष के विरोध के खिलाफ मंगलवार को लखनऊ में ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ का आयोजन किया गया, इस विशाल मार्च में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी सहित हजारों महिलाओं ने भाग लिया, सड़कें “महिला सशक्तीकरण” और “जन आक्रोश” के नारों से गूंज उठीं,प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध जताया।

क्या है पूरा मामला?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 17 अप्रैल को संसद में इस विधेयक पर महत्वपूर्ण मतदान हुआ, जिसमें विपक्ष के विरोध के कारण इसे बाधा का सामना करना पड़ा, आरोप है कि कांग्रेस और सपा ने न केवल इसका विरोध किया, बल्कि मतदान के बाद अपनी प्रतिक्रिया को लेकर भी विवादों में घिर गईं।

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महिला सशक्तीकरण का संदेश

उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि यह आंदोलन प्रदेश की महिला शक्ति की आवाज है, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की “संकीर्ण मानसिकता” के कारण इस कानून में बाधा उत्पन्न हुई, केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और 2027 तक महिला आरक्षण की दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे।

विपक्ष पर आरोप

राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि विपक्ष ने नारी अधिकारों के अवसर को बाधित किया है, जिससे देशभर में जन आक्रोश पैदा हुआ है, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में 33% भागीदारी देने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष ने इसमें रुकावट डाली।

राजनीतिक संदेश

नेताओं ने दावा किया कि इस मुद्दे का असर आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा, उन्होंने कहा कि जनता इस विषय पर विपक्ष को जवाब देगी और महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार के प्रयासों को समर्थन देगी।

निष्कर्ष

लखनऊ की यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला अधिकारों और राजनीतिक विमर्श का बड़ा मंच बनकर उभरी, अब नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

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