लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह बदलाव वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो-क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति और केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “लैब टू लैंड” की अवधारणा अब पूरी तरह धरातल पर उतर चुकी है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार देखने को मिला है। बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता फोकस इस बदलाव के प्रमुख संकेत हैं।
सीएम योगी ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि पहले ये केंद्र निष्क्रिय थे, लेकिन अब इन्हें सशक्त किया गया है। प्रदेश के सभी 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए कृषि विकास को नई दिशा मिल रही है। वैज्ञानिक अब खेतों तक पहुंचकर किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश की कृषि विकास दर लगभग 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। साथ ही, धान के उत्पादन में भी बड़ा सुधार हुआ है और कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 100 कुंतल तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने तकनीक को कृषि विकास का अहम आधार बताते हुए कहा कि वाराणसी में स्थापित इंटरनेशनल राइस इंस्टीट्यूट और आगरा में प्रस्तावित इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर जैसे संस्थान किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। इनसे नई किस्मों और बेहतर उत्पादन तकनीकों का विकास हो रहा है।
उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, लागत कम करने और गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि किसानों को अब बेहतर जानकारी, संसाधन और बाजार मिल रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में अब किसान एक के बजाय तीन-तीन फसलें उगा रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खरीद केंद्रों की स्थापना और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां गेहूं, चावल, आलू और तिलहन के उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि तकनीक, वैज्ञानिकों और किसानों के समन्वय से उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।





