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बिहार राजनीति में तीखा टकराव: सम्राट चौधरी बनाम रोहिणी आचार्य

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बिहार की सियासत में बयानबाज़ी का स्तर एक बार फिर गरमा गया है, सम्राट चौधरी और रोहिणी आचार्य के बीच जुबानी जंग ने राजनीतिक माहौल को और तीखा बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को सदन में विश्वासमत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में व्यक्तिगत हमलों (पर्सनल अटैक) पर नाराज़गी जताई, उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो अपने परिवार में महिलाओं का सम्मान नहीं करता, वह राज्य की महिलाओं का सम्मान क्या करेगा।

रोहिणी आचार्य का पलटवार

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखा जवाब दिया, उन्होंने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी खुद पर्सनल अटैक पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जबकि अतीत में वे भी व्यक्तिगत टिप्पणियाँ कर चुके हैं।

रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा कि मुख्यमंत्री शायद यह भूल गए हैं कि उन्होंने एक बेटी द्वारा अपने पिता को किडनी देने जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

हलफनामों पर उठाए सवाल

रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री द्वारा दाखिल हलफनामों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने दावा किया कि हलफनामों में कई विरोधाभास हैं, कई विसंगतियों पर अब तक जवाब नहीं दिया गया, सार्वजनिक जीवन में हर चीज़ जनता की निगरानी में होती है

“14 करोड़ जनता का आशीर्वाद” बयान पर सवाल

सम्राट चौधरी के इस दावे पर कि उन्हें बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है, रोहिणी ने तंज कसते हुए पूछा क्या सभी 14 करोड़ लोगों ने वोट किया?, क्या बिहार में इतने मतदाता हैं?, क्या चुनाव उनके चेहरे पर लड़ा गया था? उन्होंने इस दावे को “हकीकत से दूर” बताया।

मुख्यमंत्री की वैधता पर भी उठे सवाल

रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री को जनता ने सीधे तौर पर नहीं चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि असली चेहरा कोई और था, जिसे साजिश के तहत हटाया गया।

“पाठशाला” वाले बयान पर कटाक्ष

सम्राट चौधरी के इस बयान कि वे “किसी की पाठशाला से नहीं हैं” पर रोहिणी ने तंज कसते हुए कहा कि, “मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जगहों से अवसरवाद की राजनीति सीखी है और किसी एक विचारधारा पर टिके नहीं रहे।”

निष्कर्ष

यह पूरा विवाद दर्शाता है कि बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी थमने वाला नहीं है, जहां एक ओर सत्ता पक्ष खुद पर हो रहे हमलों का विरोध कर रहा है, वहीं विपक्ष उनके पुराने बयानों और दावों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।