बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद सम्राट चौधरी पहली बार रविवार को अपने गृह जिला मुंगेर और विधानसभा क्षेत्र तारापुर पहुंचे, जहां उन्होंने विकास योजनाओं के साथ-साथ अफसरशाही पर भी कड़ा रुख अपनाया।
कामचोर अफसरों को सख्त चेतावनी
तारापुर की जनसभा में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब सरकारी दफ्तरों में जनता से जुड़ी फाइलें धूल नहीं खाएंगी, उन्होंने चेतावनी दी कि प्रखंड, अंचल और थानों की निगरानी अब सीधे CMO से होगी, 30 दिन से ज्यादा फाइल रोकने पर सख्त कार्रवाई तय, जानबूझकर देरी को “भ्रष्टाचार” माना जाएगा सीएम के इस बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
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“कानून सबके लिए बराबर” का संदेश
अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर अपनी जीरो टॉलरेंस नीति दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने खुद का उदाहरण दिया, उन्होंने बताया कि उनके आवास की सीढ़ी भी सरकारी जमीन पर पाई गई, जिसे हटाया जा रहा है, सीएम ने कहा “जब मुख्यमंत्री के घर पर कानून लागू हो सकता है, तो किसी और को छूट नहीं मिलेगी।”
जनता के लिए नई व्यवस्था: “सहयोग कार्यक्रम”
मुख्यमंत्री ने प्रशासन को जनता के करीब लाने के लिए नई पहल शुरू करने का ऐलान किया है, इसके तहत हर महीने पंचायत स्तर पर 2 दिवसीय शिविर, जिला और प्रखंड अधिकारी रहेंगे मौजूद, पेंशन, राशन कार्ड, जमीन और पुलिस मामलों का ऑन-द-स्पॉट समाधान
तारापुर को मिलेगा इको-टूरिज्म का तोहफा
अपने क्षेत्र के विकास को गति देते हुए सीएम ने 12.49 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, ढोल पहाड़ी को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा
विकास और सख्ती दोनों मोर्चों पर सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के विकास मॉडल को आगे बढ़ाते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बिजली, सड़क और पानी की व्यवस्था को और बेहतर बनाएगी हाल ही में घोषित 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को उन्होंने जनता के लिए बड़ा कदम बताया।
निष्कर्ष
तारापुर दौरे ने यह साफ कर दिया है कि नई सरकार का फोकस सिर्फ विकास पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही पर भी है, अब सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीनी स्तर पर बदलाव ला पाएगी या सिस्टम की चुनौतियां फिर भी भारी पड़ेंगी।






