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गुरुग्राम बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुरंत रोक से इनकार; हाईकोर्ट जाने को कहा

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Supreme Court of India ने गुरुग्राम में चल रही अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। बुलडोजर एक्शन पर तत्काल रोक लगाने की मांग लेकर पहुंचे याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं मिली। अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस कार्रवाई से प्रभावित है, तो उसे पहले Punjab and Haryana High Court का रुख करना चाहिए।यह फैसला गुरुग्राम में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच आया है, जहां प्रशासन ने कई प्रमुख और पॉश इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

गुरुग्राम प्रशासन पिछले कुछ समय से शहर के अलग-अलग हिस्सों में अवैध कब्जों और गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ अभियान चला रहा है। इस कार्रवाई के तहत DLF Phase 1, Golf Course Road, South City समेत कई पॉश इलाकों में रैंप, गार्ड रूम, बाउंड्री वॉल और सार्वजनिक सड़कों पर बने ढांचों को हटाया जा रहा है।प्रशासन का कहना है कि कई निर्माण स्वीकृत नक्शे के खिलाफ बने हुए थे और सार्वजनिक जगहों पर कब्जा किया गया था। शहर में ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट और अव्यवस्थित शहरी ढांचे को देखते हुए यह कदम जरूरी माना गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, यह अभियान Punjab and Haryana High Court के आदेशों के बाद और तेज हुआ। अदालत ने पहले स्टिल्ट प्लस चार मंजिला निर्माण नीति पर रोक लगाई थी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने निर्माण नियमों की समीक्षा शुरू की और अवैध ढांचों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ा दी।कई क्षेत्रों में निवासियों और आरडब्ल्यूए की ओर से भी लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं कि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है।

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याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं ने Supreme Court of India में याचिका दायर कर कहा कि प्रशासन बिना उचित नोटिस दिए कार्रवाई कर रहा है और कुछ वैध निर्माणों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने अदालत से मांग की कि बुलडोजर एक्शन पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।याचिका में यह भी कहा गया कि वैध और अवैध निर्माणों के बीच अंतर किए बिना कार्रवाई से निर्दोष लोगों को नुकसान हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि यदि Punjab and Haryana High Court इस मामले में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहा है, तो सर्वोच्च अदालत सीधे उसमें बाधा क्यों बने।अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जहां तथ्यात्मक विवाद हों, वहां पहले संबंधित हाईकोर्ट ही उचित मंच होता है। इसलिए प्रभावित लोगों को पहले हाईकोर्ट में अपनी शिकायत रखनी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं को दी यह सलाह

Supreme Court of India ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे अपनी आपत्तियां और दस्तावेज लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जाएं। यदि कहीं गलत कार्रवाई हुई है या वैध निर्माण प्रभावित हुआ है, तो हाईकोर्ट स्तर पर राहत मांगी जा सकती है।

प्रशासन का पक्ष

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह अभियान शहर को बेहतर बनाने, ट्रैफिक दबाव कम करने और मास्टर प्लान के अनुसार विकास सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक भूमि और सड़कों पर कब्जा हटाना जरूरी है।

आगे क्या?

अब इस मामले में अगला कानूनी कदम संभवतः Punjab and Haryana High Court में उठाया जाएगा। वहीं गुरुग्राम में अतिक्रमण विरोधी अभियान फिलहाल जारी रहने की संभावना है। शहर के कई इलाकों में लोग अब यह देख रहे हैं कि आगे प्रशासन किन क्षेत्रों में कार्रवाई करता है।

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