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योगी सरकार की पहल से मिल रही गति, धार्मिक स्थलों के कायाकल्प से यूपी में बढ़ रहा पर्यटन

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास और आस्था को साथ लेकर चलने की नीति लगातार जमीन पर साकार हो रही है। इसी कड़ी में पर्यटन विभाग ने बुलंदशहर, चंदौली और चित्रकूट जनपदों में कुल 17 परियोजनाओं के लिए 997 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों का कायाकल्प कर वहां बुनियादी सुविधाएं विकसित करना है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

बुलंदशहर में 315 लाख रुपये की 5 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें स्याना क्षेत्र के ऊंचागांव स्थित सिद्ध बाबा (काल भैरव) मंदिर के लिए 52 लाख, खुर्जा में बौद्ध महासभा संस्थान के लिए 88 लाख, डिबाई में मां आशवर देवी मंदिर के लिए 46 लाख, शिकारपुर के बरामऊ स्थित शिव मंदिर के लिए 53 लाख और अनूपशहर के छोटी माता मंदिर के लिए 76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

चंदौली जनपद में 476 लाख रुपये की 6 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसमें मुगलसराय क्षेत्र के बिलारीडीह स्थित शंकर मंदिर के लिए 65 लाख, सकलडीहा के पदमनाथपुर में हनुमान मंदिर के लिए 70 लाख, सैयदराजा में काली मंदिर के लिए 58 लाख रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा चकिया के औरवाटांड में ग्रामीण पर्यटन के लिए 25 लाख, उसी क्षेत्र के हनुमान मंदिर के लिए 114 लाख तथा चहनिया के कॉवर गांव स्थित शक्तिपीठ माता महालक्ष्मी महडौरी देवी मंदिर में बहुउद्देशीय सुविधाओं के लिए 144 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।

चित्रकूट में 206 लाख रुपये की 6 परियोजनाएं मंजूर की गईं हैं। इसमें पालेश्वरनाथ मंदिर पहाड़ी के लिए 80 लाख, सीतापुर खेड़ी चौराहे के पास पर्यटन सुविधा केंद्र के लिए 10 लाख, राम शैया स्थल के लिए 25 लाख, मानिकपुर के महर्षि वाल्मीकि लालपुर स्थित हनुमान मंदिर के लिए 26 लाख, तमसा गंगा नदी पर वाल्मीकि घाट निर्माण के लिए 50 लाख और लालापुर में महर्षि आश्रम परिक्रमा पथ के लिए 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार आस्था के साथ विकास की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को विकसित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाना है। जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है, जिसे संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। सरकार इन स्थलों की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विकास के माध्यम से न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही है।

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