पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी सफलता के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला। इसी कड़ी में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी साझा की। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सीएम योगी ने भी सभी मंत्रियों को मिठाई खिलाई, जिससे सरकार और संगठन के बीच समन्वय का संदेश देने की कोशिश साफ दिखी।
दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव में यूपी बीजेपी के कई बड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। चुनाव प्रचार में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य दोनों ही सक्रिय भूमिका में नजर आए थे। ऐसे में वहां मिली सफलता को यूपी बीजेपी अपनी रणनीतिक जीत के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह का माहौल है।सियासी संदेश और अंदरूनी समीकरणइस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम राजनीतिक पहलू यह है कि लंबे समय से विपक्ष, खासकर अखिलेश, यह नैरेटिव बनाने की कोशिश करता रहा है कि यूपी सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और डिप्टी सीएम व मुख्यमंत्री के बीच मतभेद हैं।

लेकिन जीत के बाद दोनों नेताओं की एक साथ खुशमिजाज तस्वीरों ने इस धारणा को बड़ा झटका दिया है।विपक्ष के लिए क्यों बढ़ी चिंता?हाल ही में अखिलेश यादव ने केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक को लेकर तंज कसा था। इस पर बीजेपी की ओर से दोनों डिप्टी सीएम के साथ साथ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पलटवार किया था। अब जिस तरह से केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ साथ दिख रहे हैं, उसे विपक्ष के उस “अंदरूनी कलह” वाले नैरेटिव के खिलाफ मजबूत जवाब माना जा रहा है।आगे के चुनावी संकेतराजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह घटनाक्रम सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाले चुनावों खासतौर पर यूपी की राजनीति के लिए बड़ा संदेश भी है।
बीजेपी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर एकजुटता है। वहीं विपक्ष की “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” रणनीति के सामने यह एक काउंटर नैरेटिव बन सकता है।कुल मिलाकर, बंगाल सहित अन्य राज्यों की जीत ने यूपी बीजेपी को नई ऊर्जा दी है। केशव मौर्य और योगी आदित्यनाथ की साथ दिखी यह केमिस्ट्री न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाली है, बल्कि विपक्ष के लिए भी आने वाले समय में सियासी चुनौती बन सकती है।






