AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की पहल
Supreme Court of India ने अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि AI के उपयोग पर रोक नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी जानकारी पर नियंत्रण और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
फर्जी सिटेशन से बढ़ी चिंता
अदालत ने यह कदम तब उठाया जब National Company Law Tribunal (NCLT) मुंबई और आंध्र प्रदेश की एक ट्रायल कोर्ट के आदेशों में “फर्जी” या AI-जनित केस सिटेशन पाए गए। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा बताया।
जवाबदेही तय करने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील या पक्षकार अदालत में अप्रमाणित या फर्जी जानकारी पेश करता है, तो वह जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह केवल गलती नहीं, बल्कि गंभीर कदाचार माना जाएगा और इसके कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
BCI और विशेषज्ञों से मांगे सुझाव
Bar Council of India (BCI) को निर्देश दिया गया है कि वह AI के उपयोग पर एक विशेषज्ञ समिति बनाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके साथ ही अटॉर्नी जनरल R. Venkataramani और वरिष्ठ अधिवक्ता Shyam Divan से भी सुझाव मांगे गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव का भी अध्ययन
अदालत ने संकेत दिया कि अन्य देशों के अनुभवों का अध्ययन कर भारत में AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए ठोस और प्रभावी दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे। इस मामले की अगली सुनवाई इसी महीने तय की गई है।




