17,043 पुलिस मुठभेड़ में 34,253 अपराधी गिरफ्तार, 11,834 घायल
मेरठ जोन एनकाउंटर में पहले स्थान पर, वाराणसी दूसरे और आगरा तीसरे नंबर पर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लगातार सख्त होती नजर आ रही है। पिछले नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए 289 दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 9 वर्षों में प्रदेशभर में कुल 17,043 पुलिस मुठभेड़ हुईं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 11,834 अपराधी घायल हुए। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए।

मेरठ जोन एनकाउंटर में सबसे आगे
प्रदेश में एनकाउंटर की कार्रवाई में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा। यहां कुल 4,813 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 97 कुख्यात अपराधी ढेर किए गए। साथ ही 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 3,513 अपराधी घायल हुए।
मुठभेड़ों के दौरान मेरठ जोन में 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 2 पुलिसकर्मी शहीद भी हुए।
वाराणसी और आगरा जोन भी टॉप-3 में शामिल
एनकाउंटर के मामले में वाराणसी जोन दूसरे स्थान पर रहा, जहां 1,292 मुठभेड़ों में 29 अपराधियों को ढेर किया गया और 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
वहीं आगरा जोन तीसरे स्थान पर रहा, जहां 2,494 मुठभेड़ों में 24 अपराधियों को मार गिराया गया और 5,845 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
कमिश्नरेट में गाजियाबाद अव्वल
कमिश्नरेट स्तर पर गाजियाबाद कमिश्नरेट सबसे आगे रहा, जहां 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधी ढेर किए गए।
इसके अलावा लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़ों के दौरान 20 अपराधी मारे गए, जबकि लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़ों में 12 अपराधियों को ढेर किया गया।
गैंगस्टर एक्ट और संपत्ति कुर्की से अपराधियों पर शिकंजा
योगी सरकार का दावा है कि सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं, बल्कि गैंगस्टर एक्ट, एनएसए और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई ने भी संगठित अपराध और माफियाओं पर लगाम लगाने का काम किया है।
सरकार के अनुसार, अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के चलते प्रदेश में अपराधियों में भय का माहौल बना है और कई अपराधी प्रदेश छोड़ने या अपराध से दूरी बनाने को मजबूर हुए हैं।
कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का बड़ा दावा
योगी सरकार का कहना है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।






