देश की राजनीति, सोशल मीडिया और शेयर बाजार तीनों जगह इन दिनों एक टॉफी की चर्चा हो रही है। वजह बनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह मुलाकात, जिसमें उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को भारत की लोकप्रिय “मेलोडी टॉफी” गिफ्ट की। इसके बाद सोशल मीडिया पर “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” वाला पुराना विज्ञापन संवाद फिर से ट्रेंड करने लगा और देखते ही देखते गूगल सर्च से लेकर शेयर बाजार तक इसका असर दिखाई देने लगा।
गूगल पर बढ़ी मेलोडी टॉफी की सर्च
पीएम मोदी के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों ने बड़े पैमाने पर “Melody Toffee”, “Parle Melody” और “Melody chocolate toffee” जैसे शब्द गूगल पर सर्च करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मेलोडी टॉफी को लेकर मीम्स, वीडियो और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।इससे पहले “झालमुड़ी डिप्लोमेसी” की चर्चा हुई थी, अब “मेलोडी डिप्लोमेसी” सुर्खियों में है। खास बात यह रही कि लोगों ने सिर्फ टॉफी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी कंपनियों के बारे में भी जानकारी तलाशनी शुरू कर दी।

शेयर बाजार में क्यों आया उछाल?
मेलोडी टॉफी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही शेयर बाजार में एक दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला। “पारले” नाम से जुड़ी लिस्टेड कंपनी Parle Industries के शेयरों में अचानक खरीदारी बढ़ गई और कंपनी का शेयर करीब 5% उछलकर ₹5.25 तक पहुंच गया।हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी Parle Products शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है। यानी निवेशकों ने जिस कंपनी के शेयर खरीदे, उसका मेलोडी टॉफी से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
दरअसल, “पारले” नाम देखकर कई छोटे निवेशकों और ट्रेडर्स में भ्रम की स्थिति बन गई। सोशल मीडिया पर वायरल खबरों और अचानक बढ़े सर्च ट्रेंड के कारण “पारले इंडस्ट्रीज” के शेयरों में तेजी आ गई, जबकि मेलोडी ब्रांड का मालिकाना हक “पारले प्रोडक्ट्स” के पास है।

पारले प्रोडक्ट्स क्या है?
भारत की सबसे प्रसिद्ध FMCG कंपनियों में से एक है। यह कंपनी पारले-जी बिस्कुट, मेलोडी टॉफी, किस्मी, मोंगो बाइट और कई लोकप्रिय उत्पाद बनाती है। लेकिन यह एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए इसके शेयर शेयर बाजार में ट्रेड नहीं होते।यही कारण है कि निवेशक सीधे “मेलोडी टॉफी” की लोकप्रियता का फायदा उठाने के लिए उसके शेयर नहीं खरीद सकते।
सोशल मीडिया ट्रेंड और शेयर बाजार का कनेक्शन
हाल के वर्षों में यह कई बार देखा गया है कि किसी वायरल वीडियो, राजनीतिक बयान या सोशल मीडिया ट्रेंड का असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है। कई बार नाम मिलते-जुलते होने की वजह से निवेशक भ्रमित होकर दूसरी कंपनियों के शेयर खरीद लेते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले यह जांचना बेहद जरूरी है कि उसका वास्तविक व्यवसाय क्या है और वह जिस ब्रांड या उत्पाद की चर्चा हो रही है, उससे सचमुच जुड़ी भी है या नहीं।
निवेशकों के लिए सबक
मेलोडी टॉफी प्रकरण ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सोशल मीडिया का प्रभाव अब सिर्फ ट्रेंड तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बाजार की चाल भी बदल सकता है। हालांकि केवल वायरल चर्चा के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश से पहले कंपनी की बुनियादी स्थिति, कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और वास्तविक ब्रांड कनेक्शन की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।






