सहारनपुर में सपा सांसद इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई बहस का मामला लगातार सुर्खियों में है, थाने में हुई इस नोकझोंक और वायरल वीडियो ने पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चा में ला दिया है, यह विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
पूरा मामला सहारनपुर के दशाले गांव में युवक मोनू की हत्या के बाद शुरू हुआ, परिजन लगातार आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे, इसी दौरान मृतक की मां और परिवार के कुछ लोग सांसद इकरा हसन के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचे थे, आरोप है कि वहां उनकी बात ठीक से नहीं सुनी गई, और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर 151 की कार्रवाई की गई।
थाने में पहुंचीं इकरा हसन, बढ़ा तनाव
हिरासत की जानकारी मिलते ही इकरा हसन सीधे सदर बाजार थाने पहुंचीं। उनके साथ समर्थकों की भीड़ भी मौजूद थी। थाने के अंदर सांसद लगातार पुलिस अधिकारियों से सवाल पूछती रहीं और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग करती रहीं।
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उनका आरोप था कि पुलिस ने संवेदनहीन रवैया अपनाया और पीड़ित परिवार को ही परेशान किया गया।
“हमें इनका पानी नहीं पीना…” – वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद
थाने के अंदर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें पुलिस की ओर से पानी ऑफर किए जाने पर इकरा हसन ने नाराजगी जताते हुए कहा— “हमें इनका पानी नहीं पीना, अपना मंगा लो…” यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
“अगर 151 लगा है तो मेरा भी लगाओ”
सांसद ने यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार पर 151 की कार्रवाई की गई है, तो उनका भी चालान किया जाए क्योंकि वह भी उनके साथ मौजूद थीं, उन्होंने कहा कि अगर न्याय मांगना अपराध है, तो आम जनता आखिर जाए कहां।
महिला दारोगा से बहस का वीडियो भी वायरल
एक अन्य वीडियो में एक महिला दारोगा द्वारा सांसद की पीठ पर हाथ रखने पर भी विवाद हुआ। इस पर इकरा हसन नाराज हो गईं और कहा— “हाथ मत लगाइए…”, इस वीडियो ने भी सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया।
“जनता की जगह किसी की जागीर नहीं”
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की थी। उन्होंने कहा कि यह जनता की जगह है, किसी की जागीर नहीं।
देर रात तक थाने में चला हंगामा
देर रात तक थाने में तनावपूर्ण माहौल बना रहा, समर्थकों की भीड़ बढ़ती रही और पुलिस स्थिति संभालने में जुटी रही, बाद में अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ा जाएगा, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है और राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। वायरल वीडियो और सांसद के बयानों ने इस पूरे प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।






