उत्तर प्रदेश में जनगणना का सबसे बड़ा अभियान शुरू हो गया है, अब गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार, मकान, सुविधाओं और दैनिक जीवन से जुड़ी अहम जानकारी जुटाएंगे, 22 मई से 20 जून तक चलने वाले इस पहले चरण में प्रदेशभर में 5.25 लाख अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
इस बार जनगणना में लोगों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, इनमें मकान की स्थिति, दीवार और छत में इस्तेमाल सामग्री, बिजली, पानी, शौचालय, मोबाइल, इंटरनेट, वाहन और रसोई गैस जैसी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।
48 लाख से ज्यादा लोगों ने की स्वगणना
पहली बार सरकार ने लोगों को खुद जानकारी भरने यानी स्वगणना की सुविधा भी दी थी। गुरुवार शाम तक प्रदेश के 48 लाख से ज्यादा लोग अपनी स्वगणना पूरी कर चुके हैं, जिन लोगों ने पहले ही ऑनलाइन स्वगणना कर ली है, वे गणनाकर्मी को केवल अपना एसई नंबर दिखा सकते हैं। इसके लिए किसी भी प्रकार का ओटीपी साझा करने की जरूरत नहीं होगी।
प्रदेशभर में बनाई गई विशेष व्यवस्था
जनगणना के लिए प्रदेश के 782 नगरीय निकाय, 350 तहसीलों और 1.04 लाख गांवों में विशेष व्यवस्था की गई है, इसके तहत 3.90 लाख मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं, हर गणनाकर्मी लगभग 800 आबादी या 180 से 200 मकानों की गणना करेगा।
भीषण गर्मी और लू को देखते हुए गणनाकर्मियों को सुबह 8 बजे से पहले और शाम 4 बजे के बाद घरों में जाने की सलाह दी गई है।
किन सवालों के जवाब देने होंगे?
जनगणना के दौरान परिवारों से भवन नंबर, मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, पेयजल, बिजली, शौचालय, रसोई गैस, खाना पकाने का ईंधन, मोबाइल, स्मार्टफोन, इंटरनेट, टीवी, कंप्यूटर, वाहन और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी, इसके अलावा परिवार में विवाहित दंपत्तियों की संख्या, मुख्य अनाज और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी।
गणनाकर्मी की पहचान कैसे करें?
गणनाकर्मी की पहचान क्यूआर कोड वाले आधिकारिक परिचय पत्र से की जा सकेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत गणनाकर्मियों को ही जानकारी दें और किसी के साथ ओटीपी साझा न करें।
पहले चरण में नहीं होगी जातिगत गणना
सरकार के अनुसार पहले चरण में जाति से जुड़ी जानकारी नहीं ली जाएगी। जातिगत और व्यक्तिगत जानकारी अगले वर्ष फरवरी में शुरू होने वाले दूसरे चरण में दर्ज की जाएगी।
स्वगणना में कौन से जिले आगे?
स्वगणना करने वालों में शाहजहांपुर सबसे आगे रहा, जहां करीब 2.96 लाख लोगों ने प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद आजमगढ़, बरेली, मुरादाबाद और सोनभद्र का स्थान रहा। वहीं कौशांबी, हमीरपुर, संतकबीरनगर और जालौन में सबसे कम लोगों ने स्वगणना की है। राजधानी लखनऊ में अब तक 98 हजार से ज्यादा लोगों ने स्वगणना पूरी की है।
जनगणना क्यों है महत्वपूर्ण?
जनगणना के जरिए सरकार को प्रदेश की आबादी, आवास, शिक्षा, सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वास्तविक आंकड़ा मिलता है, इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजनाएं, बजट और विकास कार्य तय किए जाते हैं।
ये हैं वो सवाल जो आपसे पूछे जाएंगे
- भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकरण अथवा जनगणना नंबर)
- जनगणना मकान नंबर
- जनगणना मकान के फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
- जनगणना मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
- जनगणना मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
- जनगणना मकान के उपयोग
- जनगणना मकान की हालत
- परिवार क्रमांक
- परिवार में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- परिवार के मुखिया का लिंग
- क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अन्य से संबंधित है
- मकान के स्वामित्व की स्थिति
- परिवार के पास रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या
- परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या
- पेयजल का मुख्य स्रोत
- पेयजल स्रोत की उपलब्धता
- प्रकाश का मुख्य स्रोत
- शौचालय की सुलभता
- शौचालय का प्रकार
- गंदे पानी की निकासी
- स्नानगृह की उपलब्धता
- रसोईघर और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता
- खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन
- रेडियो/ट्रांजिस्टर
- टेलीविजन
- इंटरनेट सुविधा
- लैपटॉप/कंप्यूटर
- टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन
- साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
- कार/जीप/वैन
- परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज
- मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधी संसूचना के लिए)






