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Lucknow Land Scam: जमीन घोटाले की जांच में ED की एंट्री, LDA से 300 करोड़ की फाइलें तलब, 234 प्लॉट आवंटन पर उठे सवाल

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र से जुड़े कथित जमीन घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। करोड़ों रुपये के भूमि समायोजन (Land Adjustment) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच की रफ्तार बढ़ाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के अर्जन विभाग से करीब 300 करोड़ रुपये से संबंधित फाइलों और दस्तावेजों का रिकॉर्ड तलब किया है।सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में दिवंगत भूमाफिया दिलीप सिंह बाफिला के करीबी लोगों के साथ-साथ तत्कालीन LDA अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी आ सकती है।

भूमि समायोजन के नाम पर करोड़ों के घोटाले का आरोप

जांच एजेंसियों को आशंका है कि गोमतीनगर और गोमतीनगर विस्तार में भूमि समायोजन की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर सहकारी आवास समितियों के माध्यम से निर्धारित सीमा से कहीं अधिक जमीन हासिल की गई।आरोप है कि बाद में इन भूखंडों को बाफिला से जुड़े लोगों को बेहद कम कीमत पर आवंटित किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

234 भूखंडों के आवंटन में मिली थीं गंभीर अनियमितताएं

वर्ष 2010 में तत्कालीन LDA उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल की जांच में हिमालय सहकारी आवास समिति और बहुजन निर्मल समिति के माध्यम से किए गए भूखंड आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई थीं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 234 भूखंडों के समायोजन में गड़बड़ी पाई गई थी, जिनमें:

  • हिमालय सहकारी आवास समिति के 122 भूखंड
  • बहुजन निर्मल समिति के 112 भूखंड
  • शामिल थे।जांच में यह भी आरोप सामने आया था कि परिवार और रिश्तेदारों को सदस्य बनाकर प्राइम लोकेशन वाले बड़े भूखंड आवंटित किए गए।

फर्जी सदस्यों के नाम पर प्लॉट आवंटन का आरोप

शासन स्तर पर हुई जांच में भी कई फर्जी सदस्यों के नाम पर भूखंड आवंटन की पुष्टि हुई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि रिकॉर्ड पूरी तरह उपलब्ध हो जाता है तो इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वास्तविक रूप से कितनी जमीन अधिग्रहित की गई थी और उसके बदले कितनी भूमि समायोजन के तहत आवंटित की गई।

LDA के पास नहीं है पूरा रिकॉर्ड

सूत्रों के मुताबिक, LDA के अर्जन विभाग के पास कई मामलों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि ED ने पुराने दस्तावेजों और फाइलों की विस्तृत जानकारी मांगी है।अधिकारियों का मानना है कि रिकॉर्ड की कमी खुद जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बन सकती है।

दिलीप सिंह बाफिला पर पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे

दिवंगत दिलीप सिंह बाफिला के खिलाफ गोमती नगर, चिनहट, विभूतिखंड और हजरतगंज समेत विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।इससे पहले लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट उनकी 48.22 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश भी जारी कर चुका है।

कई बड़े नामों पर कस सकता है शिकंजा

ED की सक्रियता के बाद अब इस बहुचर्चित लखनऊ जमीन घोटाले में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों, सहकारी समितियों और लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच शुरू हो गई है।जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई प्रभावशाली नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस मामले को उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित भूमि घोटालों में से एक माना जा रहा है।