पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 12 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया। आरोप है कि बच्ची के साथ दरिंदगी हुई, फिर उसकी हत्या कर शव को बोरी में भरकर तालाब में फेंक दिया गया। इस घटना के बाद जनता का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा और पूरे इलाके में तनाव फैल गया।अब इस मामले का मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया है। पुलिस का दावा है कि क्राइम सीन पर ले जाते समय उसने पुलिसकर्मी की रिवॉल्वर छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली मार दी गई।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल एनकाउंटर नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर है।विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि ममता बनर्जी सरकार में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। संदेशखाली से लेकर आरजी कर अस्पताल और अब बरुईपुर तक, हर बड़ी घटना के बाद सरकार विपक्ष के निशाने पर आई है। आलोचकों का कहना है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई होती है, लेकिन अपराध रोकने की व्यवस्था आखिर कहां है?भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी और विपक्षी दल लगातार दावा कर रहे हैं कि बंगाल में अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो चुका है।
उनका आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और कमजोर कार्रवाई के कारण अपराधियों के हौसले बढ़े हैं।उधर जांच में सामने आया है कि बच्ची के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं और शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फेफड़ों में पानी मिलने की बात भी सामने आई है। यानी आशंका है कि उसे जीवित अवस्था में तालाब में फेंका गया था।अब बंगाल की जनता जवाब मांग रही है। सवाल सिर्फ एक आरोपी के एनकाउंटर का नहीं है। सवाल यह है कि आखिर एक और बेटी की जान जाने के बाद ही इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों हुई? क्या अपराधियों में कानून का डर पैदा होगा या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा?






