उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगर किसी एक चेहरे ने पिछले कुछ वर्षों में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। एक ऐसा नेता, जिसकी पहचान सिर्फ एक मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक सख्त प्रशासक, हिंदुत्व के बड़े चेहरे और भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में भी होती है। 22 साल की उम्र में सांसारिक जीवन छोड़ने वाला एक युवा आखिर कैसे गोरक्षपीठ का महंत बना, फिर देश का सबसे युवा सांसद और उसके बाद देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री?इसके आलावा भविष्य के प्रधान मंत्री के रूप में जाने जाने वाले योगी आदित्यनाथ का 54 वा जन्मदिन है तो आइये जानते हैं अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने तक का पूरा सफर।
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5 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 54 वर्ष के हो गए। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक समेत कई नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विपक्ष के कई नेताओं ने भी उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में 5 जून 1972 को जन्मे अजय सिंह बिष्ट ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनका नाम एक दिन देश की सबसे चर्चित राजनीतिक हस्तियों में गिना जाएगा। सात भाई-बहनों वाले एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की पढ़ाई की। लेकिन 22 साल की उम्र में उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उनका पूरा भविष्य बदल दिया। साल 1994 में गोरखनाथ मंदिर पहुंचे अजय सिंह बिष्ट ने महंत अवैद्यनाथ से दीक्षा ली और संन्यास का मार्ग चुन लिया। यहीं से अजय सिंह बिष्ट, योगी आदित्यनाथ बन गए। संन्यासी बनने के कुछ ही वर्षों बाद उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। वर्ष 1998 में महज 26 साल की उम्र में उन्होंने गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीता और उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बना ली। पूर्वांचल की राजनीति में योगी आदित्यनाथ का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। गोरक्षपीठ की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौरान हिंदुत्व, धर्मांतरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उनके आक्रामक तेवरों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। राजनीतिक सफर में विवाद भी आए, विरोध भी हुआ और कई बार उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन समर्थकों का मानना है कि योगी ने हर चुनौती का सामना करते हुए अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत किया।

साल 2017 उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐतिहासिक साबित हुआ। भाजपा की प्रचंड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। 19 मार्च 2017 को उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली। मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून-व्यवस्था, अपराध और माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनकी सरकार सबसे ज्यादा चर्चा में रही। बुलडोजर कार्रवाई ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई। समर्थकों ने उन्हें “बुलडोजर बाबा” का नाम दिया, जबकि विरोधियों ने उनकी नीतियों पर सवाल भी उठाए। साल 2022 में योगी आदित्यनाथ ने एक और बड़ा राजनीतिक रिकॉर्ड बनाया। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटे। उत्तर प्रदेश में करीब चार दशक बाद ऐसा हुआ जब कोई मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आया। योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या भी हमेशा चर्चा में रहती है। बताया जाता है कि उनकी सुबह करीब तीन बजे शुरू होती है। योग, पूजा-पाठ, गोसेवा, जनता दरबार और सरकारी बैठकों के बीच उनका पूरा दिन व्यस्त रहता है। यही वजह है कि समर्थक उन्हें बेहद अनुशासित और कर्मठ नेता के रूप में देखते हैं।आज योगी आदित्यनाथ सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नेता नहीं माने जाते। भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में उन्होंने कई राज्यों के चुनावों में प्रचार किया है। उनके भाषणों और राजनीतिक शैली की चर्चा देशभर में होती है। यही कारण है कि समय-समय पर राष्ट्रीय राजनीति में भी उनके बढ़ते कद को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। 22 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़कर संन्यास लेने वाला एक युवक… 26 साल में सांसद बनता है… फिर गोरक्षपीठ का महंत और उसके बाद देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री। योगी आदित्यनाथ का यह सफर भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित यात्राओं में से एक माना जाता है। 54वें जन्मदिन पर समर्थक उन्हें विकास और हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बताते हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक उन्हें भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनते हैं। अब आने वाले वर्षों में उनका राजनीतिक सफर किस नई ऊंचाई तक पहुंचता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।






