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मोदी शाह के सबसे करीबी मंत्री पर मंडराया इस्तीफा देने का खतरा ! देश भर में मचा बवाल !

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देश की राजनीति इस वक्त एक ऐसे ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ी है जहां कभी भी कुछ भी हो सकता है और एक बड़ा सियासी विस्फोट देखने को मिल सकता है। जी हां, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सड़कों पर विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। बेरोजगारी, युवाओं के अपमान और बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर देश का एक बड़ा वर्ग सरकार से जवाब मांग रहा है।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठ रही है और इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने बीजेपी के दिग्गजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नई-नई बनी कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ ऐलान कर दिया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इतना बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा जिसको देश ने न अभी तक देखा और न ही सुना है । पार्टी का दावा है कि यह लड़ाई किसी नेता या दल के खिलाफ नहीं बल्कि उन करोड़ों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है जो वर्षों तक मेहनत करने के बाद भी बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक नाम ऐसा भी है जिसकी चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है और वह नाम है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार के कुछ फैसलों को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आखिर अगले 24 घंटे में क्या कुछ होने वाला है, क्या दिल्ली का आंदोलन कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देगा और क्या युवाओं के मुद्दे देश की राजनीति का नया केंद्र बनने जा रहे हैं, यही जानेंगे इस खास रिपोर्ट में। दरअसल, पिछले कुछ समय से बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी उन्हें बार-बार अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के भरोसे को झटका पहुंचाया है और इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक लड़ाई भी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और खासतौर पर शिक्षा मंत्रालय को निशाने पर लेते हुए कहा है कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। पार्टी की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर जवाबदेही तय की जाए। इसी के साथ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।

बीते दिनों अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से दिल्ली पहुंचने की अपील की थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए समर्थकों से कहा कि वे एयरपोर्ट पर भीड़ न लगाएं और कानून-व्यवस्था का पूरा सम्मान करें। उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से होगा और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था पैदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अभिजीत दीपके ने अपने संदेश में कहा कि उनकी अपील पर बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रतिक्रिया दी है। उनका दावा है कि बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर के युवा एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने समर्थकों से शांति बनाए रखने और विरोध को संवैधानिक दायरे में रखने की अपील की है। इधर दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारियां चल रही हैं तो उधर राजनीतिक विश्लेषक एक और दिलचस्प पहलू की चर्चा कर रहे हैं। चर्चा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर है। विश्लेषकों का कहना है कि कानून-व्यवस्था, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और विकास परियोजनाओं के कारण योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। खास बात यह है कि ऐसे समय में जब राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है, योगी आदित्यनाथ का नाम भी लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। आज योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन भी है और इस मौके पर उनके समर्थक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उन्हें शुभकामनाएं देने वालों की बड़ी संख्या दिखाई दे रही है। यही वजह है कि राजनीतिक चर्चाओं में एक तरफ बेरोजगारी और पेपर लीक का मुद्दा है तो दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता की भी चर्चा हो रही है। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि किसी भी आंदोलन की असली ताकत जनता के समर्थन से तय होती है। अगर युवा बड़ी संख्या में किसी मुद्दे पर एकजुट होते हैं तो उसका असर राजनीतिक दलों और सरकारों पर भी पड़ता है। वहीं अगर आंदोलन सीमित दायरे में रह जाता है तो उसका प्रभाव भी उसी अनुपात में दिखाई देता है। अब सबकी नजर 6 जून पर टिकी हुई है। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में कितने लोग शामिल होते हैं, सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर की बहस बन पाता है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ चुका है। तो क्या युवाओं के मुद्दे आने वाले दिनों में देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे? क्या बेरोजगारी और पेपर लीक का मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेगा? और क्या दिल्ली का यह प्रदर्शन किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत साबित होगा?