लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में महाकुंभ 2025 आयोजन को स्वर्ण पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने डिजिटल सुशासन और बड़े आयोजनों के सफल प्रबंधन का राष्ट्रीय स्तर पर नया मानक स्थापित किया है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा संचालित महाकुंभ 2025 परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ ई-गवर्नेंस पहलों में शामिल किया गया है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की ओर से दिए जाने वाले इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनसेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने वाली परियोजनाओं को सम्मानित करना है।
महाकुंभ 2025 दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन रहा, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, डिजिटल सूचना सेवाएं, निगरानी व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं के संचालन में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया। इसी प्रभावी डिजिटल प्रबंधन के कारण महाकुंभ को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार महाकुंभ 2025 ने बड़े आयोजनों के संचालन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सूचना उपलब्धता को तकनीक के माध्यम से बेहतर बनाने के प्रयासों को देशभर में सराहा गया है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के तहत इस वर्ष 10 गोल्ड अवॉर्ड, 6 सिल्वर अवॉर्ड और एक जूरी अवॉर्ड की घोषणा की गई है। गोल्ड अवॉर्ड विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, जबकि सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त करने वाले संस्थानों को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
पुरस्कारों का औपचारिक वितरण राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान किया जाएगा। महाकुंभ 2025 को मिला यह सम्मान उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल गवर्नेंस, नवाचार और प्रभावी प्रशासनिक क्षमता की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।






